न्याय मिला तो ही होगा विसर्जन; कन्हैयालाल के बेटे की कसम,4 साल बाद फिर गरमाया उदयपुर हत्याकांड

Apr 03, 2026 03:07 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, उदयपुर
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राजस्थान के उदयपुर में हुए चर्चित कन्हैयालाल साहू हत्याकांड को लगभग चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इंसाफ की राह अब भी लंबी नजर आ रही है। इस बीच पीड़ित परिवार का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा है। 

न्याय मिला तो ही होगा विसर्जन; कन्हैयालाल के बेटे की कसम,4 साल बाद फिर गरमाया उदयपुर हत्याकांड

राजस्थान के उदयपुर में हुए चर्चित कन्हैयालाल साहू हत्याकांड को लगभग चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इंसाफ की राह अब भी लंबी नजर आ रही है। इस बीच पीड़ित परिवार का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा है। मृतक कन्हैयालाल के बेटे यश साहू ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर न सिर्फ अपने दिल का दर्द बयां किया, बल्कि न्याय व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

“अस्थियां भी कर रही हैं न्याय का इंतजार”

यश साहू ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनके पिता की अस्थियां आज भी गंगा में विसर्जन के लिए इंतजार कर रही हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक हत्यारों को फांसी की सजा नहीं मिलती, वे अंतिम संस्कार की इस परंपरा को पूरा नहीं करेंगे।

यश का यह बयान न केवल भावनात्मक है, बल्कि यह उस पीड़ा को दर्शाता है जो एक परिवार पिछले कई वर्षों से झेल रहा है।

उन्होंने लिखा,

“जब अपराधी अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं, तो सजा में इतनी देरी क्यों? मैं अपने पिता की अस्थियां तभी विसर्जित करूंगा, जब उन्हें पूर्ण न्याय मिलेगा।

अमित शाह के पुराने वादे की याद दिलाई

यश साहू ने अपने पोस्ट के साथ केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah का साल 2022 का एक वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में अमित शाह ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए ‘स्पेशल कोर्ट’ बनाने की बात कही थी।

अब यश ने सवाल उठाया है कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तो विशेष अदालत के गठन में देरी क्यों हो रही है?

गहलोत का हमला, सियासत में भूचाल

यश की इस भावुक अपील ने राजस्थान की राजनीति को भी गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

गहलोत ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि एक पीड़ित परिवार को न्याय के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बने काफी समय हो चुका है, इसके बावजूद स्पेशल कोर्ट का गठन नहीं हुआ। गहलोत ने यह भी दावा किया कि मामले में सुनवाई की रफ्तार बेहद धीमी है और अगर ‘डे-टू-डे’ सुनवाई होती, तो अब तक दोषियों को सजा मिल चुकी होती।

जांच और सुनवाई पर उठते सवाल

इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी, लेकिन अब तक गवाहों की गवाही की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार, 160 गवाहों में से केवल लगभग 40 की ही गवाही दर्ज हो पाई है।

यही वजह है कि केस की धीमी प्रगति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

28 जून 2022: वो ‘काला दिन’ जिसने देश को झकझोर दिया

28 जून 2022 को उदयपुर के धानमंडी इलाके में दर्जी कन्हैयालाल साहू की उनकी ही दुकान में घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। दो आरोपियों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद उसका वीडियो भी बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

इंसाफ की आस में ठहरा वक्त

चार साल बाद भी कन्हैयालाल का परिवार उसी मोड़ पर खड़ा है, जहां से न्याय की उम्मीद शुरू हुई थी। बेटे यश की भावुक अपील ने यह साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक परिवार के टूटे विश्वास और अधूरे न्याय की कहानी है।

आज सबसे बड़ा सवाल यही है क्या 2026 में इस बहुचर्चित हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलेगी?

क्या कन्हैयालाल की अस्थियां गंगा में विसर्जित हो पाएंगी?

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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