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सीएम भजनलाल और किरोड़ी लाल के संबंधों में क्यों उभरी दरार? कहीं ये वजह तो नहीं है

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। किरोड़ी लाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सीएम भजनलाल और किरोड़ी लाल के संबंधों में क्यों उभरी दरार? कहीं ये वजह तो नहीं है
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरSat, 18 May 2024 06:54 AM
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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। किरोड़ी लाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पत्र में कई सवाल खड़े किए है। हालांकि, किरोड़ी लाल ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को निशाने पर नहीं लिया। लेकिन माना यहीं जा रहा है कि निशाने पर खुद मुख्यमंत्री भजनलाल ही है। दरअसल, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल ने जयपुर में गांधीनगर स्थित ओल्ड एमआरईसी कैम्पस व राजकीय कॉलोनी के पुनर्विकास योजना के नाम पीपीपी मॉडल पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने के प्रोजेक्ट में 1146 करोड़ रुपए का घोटाला होने की संभावना जताई है।किरोड़ीलाल मीणा ने इस प्रोजेक्ट में कुछ अफसरों पर आरईडीसीसी से सांठ-गांठ कर काली कमाई करने का आरोप लगाते हुए पत्र लिखा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी किरोड़ी लाल ने जल जीवन मिशन में घोटाले धांधली को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा था। जिसके बाद विभाग ने सभी टेंडरों को निरस्त कर दिया था। लेकिन अब मंत्री किरोड़ी लाल मीणा फिर एक घोटाले को लेकर सीएम भजनलाल को पत्र लिखा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किरोड़ी लाल मुख्यमंत्री को बार-बार पत्र लिखकर दबाव की रणनीति पर काम कर रहे है। बता दें किरोड़ी लाल मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी आलाकमान ने उन्हें कृषि मंत्री बनाकर तगड़ा झटका दिया। सियासी जानकारों का कहना है कि किरोड़ी लाल बार-बार खुद के इस्तीफे की बात कहकर पार्टी आलाकमान को दबाव में लाना चाहते है। इसलिए किरोड़ी लाल कह रहे है कि दौसा से बीजेपी हार जाती है तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जानकारों का कहना है कि किरोड़ी लाल कृषि मंत्री बनाने से खुश नहीं है। किरोड़ी समर्थक चाहते है कि मुख्यमंत्री नहीं तो कम से कम गृहमंत्री बनाया जाना चाहिए। राजस्थान की राजनीति में किरोड़ी लाल का बड़ा नाम है। वह जमीन से जुड़े नेता माने जाते है। जानकारों का कहना है कि गहलोत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था, वैसा ही मोर्चा इन दिनों किरोड़ी लाल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोल रखा है।

कृषि मंत्री ने आरोप लगाया है कि योजना को मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री व केबिनेट से अनुमोदित करवाए बिना ही काम शुरू कर दिया। जबकि मुख्यमंत्री ने फाइल लौटी दी। वर्तमान सरकार को विश्वास में लिए बिना इस योजना को क्रियान्वित करना कुछ अधिकारियों की स्वार्थ सिद्धि व मिलीभगत है।मीणा की मांग है कि प्रकरण की पूर्ण वित्तीय जांच व विभिन्न बिंदुओं की जांच करवाई जाए। जब तक इस योजना को लागू करने पर प्रतिबंध लगाया जाए। आचार संहिता के दौरान आवास खाली करवाने के नोटिस देना, आउट ऑफ टर्न मकान आवंटित करना व नई योजना का क्रियान्वयन करना उचित नहीं है। मास्टर प्लान में यहां 18 से 19 मंजिला बिल्डिंग बनाने का प्रावधान ही नहीं है। यहां व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी नहीं है। योजना की लागत 5 साल पहले 277 करोड़ आंकी गई, लेकिन अब 218 करोड़ रु. ही रह गई। इसे घाटे की योजना बताकर 108 फ्लैट के साथ ही 25 फ्लैट निजी हाथों में दे दिए जाएंगे। यहां हाईकोर्ट के न्यायाधिपति का निवास है। यह वीआईपी सड़क के पास बनाई जा रही है।