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राजस्थान में किसे मिलेगी मोदी की गारंटी, वसुंधरा राजे या ओम माथुर? जानिए कौन कितना मजबूत

राजस्थान में सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है। बड़ा सवाल यह है को मोदी की गारंटी किसी मिलेगी। वसुंधरा राजे की वापसी होगी या फिर नए चेहरे को मौका मिलेगा। सोमवार को नया सीएम मिलने की संभावना है।

राजस्थान में किसे मिलेगी मोदी की गारंटी, वसुंधरा राजे या ओम माथुर? जानिए कौन कितना मजबूत
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरSun, 10 Dec 2023 07:07 AM
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राजस्थान में सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है। बड़ा सवाल यह है को मोदी की गारंटी किसी मिलेगी। वसुंधरा राजे की वापसी होगी या फिर नए चेहरे को मौका मिलेगा। फिलहाल सोमवार को नए सीएम मिलने की चर्चा जोरों पर है। राजस्थान में वसुंधरा राजे, ओम माथुर, किरोड़ी लाल मीणा, अश्विनी वैष्णव, अर्जुन मेघवाल और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रमुख दावेदार माने जाते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि राजस्थान में आधा दर्जन नाम सीएम रेस की शामिल है। इनमें से कुछ नाम रेस से बाहर हो गए हैं।

महंत बालकनाथ और किरोड़ी लाल मीणा ने खुद को रेस से बाहर बताया है। जबकि वसुंधरा राजे को सीएम बनाना ही था तो पार्टी उन्हीं के चेहरे पर विधानसभा का चुनाव लड़ती। लेकिन पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा गया है। सियासी जानकारों का कहना है कि ऐसे में वसुंधरा राजे के चांस भी कम ही बन रहे हैं। 

दलित व्यक्ति या ओबीसी चेहरे पर दांव खेल सकती है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान का सीएम लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही बनाया जाएगा। ऐसे में बीजेपी दलित व्यक्ति या ओबीसी चेहरे पर दांव खेल सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल का नाम भी सीएम रेस चल रहा है। यदि पार्टी को संगठन के हिसाब से सीएम का चयन करना है तो ओम माथुर सबसे फिट दिखाई दे रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि ओम माथुर को जहां भी भेजा गया है, वहां पार्टी को जीत दिलाई है। चाहे यूपी हो या फिर छत्तीसगढ़। ऐसे में संभावना है कि ओम माथुर पर पार्टी दांव खेल सकती है। 

किरोड़ी लाल और शेखावत रेस से बाहर?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान के संभावित दावेदारों में शामिल महंत बालकनाथ ने खुद को अलग कर लिया है। बालकनाथ के ट्वीट से अटकलों को बल मिला है कि वह रेस से बाहर हो गए है। माना जा रहा है कि बालकनाथ को धैर्य रखने के लिए कहां गया है। सियासी जानकारों का कहना है कि किरोड़ी लाल पर जाति विशेष का ठपा है। ऐसे में उनकी संभावना भी कम ही दिखाई दे रही है।

सियासी जानकारों का कहना है कि किरोड़ी लाल की दिल्ली में पकड़ कमजोर है। यही वजह है कि 40 साल के राजनीतिक कैरियर में किरोड़ी लाल को संगठन और सरकार में बड़ा पद नहीं मिला है। जबकि उनसे जूनियर सतीश पूनिया, गजेंद्र सिंह शेखावत और अर्जुन मेघवाल को बड़े पद मिले हैं। ऐसे में सियासी जानकारों का कहना है कि किरोड़ी लाल पर शायद ही बीजेपी आलाकमान अपनी मुहर लगाए। किरोड़ी लालज जमीन से जुड़े नेता माने जाते हैं। यह छवि आड़े आ जाती है। 

सियासी जानकारों का कहना कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर बीजेपी दांव खेलने से परहेज कर सकती है। क्योंकि उन पर करप्शन के आरोप है। हालांकि, शेखावत मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। मोदी और अमित शाह पसंद भी करते हैं। लेकिन सियासी जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे कैंप शेखावत को पसंद नहीं करता है। ऐसे में पार्टी आलाकमान सब की सहमति शेखावत पर नहीं बना पाएगा। सियासी जानकारों का कहना है कि शेखावत को सीएम बनाने की मंशा होती वह विधायक का चुनाव लड़ते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

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