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लॉरेंस-आनंदपाल की दुश्मनी सुखदेव गोगामेड़ी पर पड़ी भारी? जानिए जानी दुश्मन बनने की वजह

राजस्थान में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड़ में लाॅरेंस विश्नोई गैंग से पुरानी अदावत होने की बात सामने आ रही है। दरअसल, बिश्नोई गैंग गोगामेड़ी को लंबे समय से अपना जानी दुश्मन मानता था।

लॉरेंस-आनंदपाल की दुश्मनी सुखदेव गोगामेड़ी पर पड़ी भारी? जानिए जानी दुश्मन बनने की वजह
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरThu, 07 Dec 2023 12:43 PM
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Sukhdev Singh Gogamedi Murder Story:राजस्थान में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड़ में लाॅरेंस विश्नोई गैंग से पुरानी अदावत होने की बात सामने आ रही है। दरअसल, बिश्नोई गैंग गोगामेड़ी को लंबे समय से अपना दुश्मन मानता था। गैंग के बड़े लीडर संपत नेहरा ने पहले ही धमकी में ये साफ कर दिया था कि गोगामेड़ी की हत्या होगी। दरअसल इस गैंग को ये लग रहा था कि गोगामेड़ी दूसरे गैंग के गैंगस्टर्स की मदद करते हैं। राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अलावा भी कई और गैंग अपराध को अंजाम दे रहे हैं। गैंग्स में अक्सर खूनी गैंगवार की खबरें आती रहती हैं और जब भी किसी गैंग को लगता है कि उनके विरोधी गैंग को कोई सपोर्ट कर रहा है तो ये उसे अपना दुश्मन मान लेते हैं और यही हुआ सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के केस में। सुखदेव सिंह का विवादों से पुराना नात रहा है। उन पर विभिन्न थानों में 35 केस दर्ज है। सुखदेव सिंह गुर्जर समाज पर पर भी प्रतिकूल टिप्पणियां कर सुर्खियों में रहे है।

गैंगस्टर आनंदपाल की मौत के बाद ही निशाने पर था 

गैंगस्टर आनंदपाल की मौत के बाद ही सुखदेव गोगामेड़ी की हत्या की कहानी लिखी गई थी। बता दें आनंदपाल सिंह औऱ विश्नोई गैंग के बीच पुरानी दुश्मनी थी। विश्नोई गैंग को आनंदपाल सिंह और सुखदेव सिंह की दोस्ती पंसद नहीं थी। आनंदपाल की हत्या के बाद कई ऐसी चीजें हुई जिसने दुश्मनी की लकीर को औऱ खींच दिया। परिणाम यह हुआ कि मौका मिलते ही सुखदेव सिंह की हत्या कर दी गई। ऐसी चर्चा है कि करणी सेना के प्रमुख बनने के बाद वो अक्सर चर्चा में रहे, लेकिन साथ ही उनके दुश्मन भी बनने लगे। कुछ समय पहले सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को लॉरेंस बिश्नोई के गैंग से धमकी मिली थी। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटर संपत नेहरा ने गोगामेड़ी को जान से मारने की बात कही थी। करणी सेना प्रमुख ने पुलिस को इस बारे में जानकारी भी दी थी,लेकिन तब ये नहीं पता था कि दुश्मनी इस कदर बड़ी हो जाएगी कि हत्या तक कर दी जाएगी।

जयपुर में उनके घर पर गोलियों से भून डाला गया

उल्लेखनीय है कि  दोपहर करीब एक बजे सुखदेव सिंह अपने घर पर ही थे। उनके एक जानने वाले नवीन शेखावत ने उनसे मिलने का वक्त मांगा था। नवीन शेखावत अपने साथ दो लोगों को को लेकर आए थे। इन दो लोगों ने सुखदेव सिंह से मिलने की इच्छा जताई थी। चारों बैठे बातें कर रहे थे, तभी दोनों लड़कों ने अपनी जेब से पिस्टल निकाल ली और सीधा सुखदेव सिंह पर गोली चला दी। नवीन शेखावत समझ ही नहीं पाए ये क्या हुआ। उन्होंने विरोध किया तो दोनों लड़कों ने उन पर भी गोलियां दाग दी। 17 राउंड फायरिंग हुई और फिर दोनों फरार हो गए।

बिश्नोई गैंग ने ली सुखदेव गोगामेड़ी के कत्ल की जिम्मेदारी

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी और उनके दोस्त को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी। अब सवाल ये था कि हत्या किसने की। पुलिस की जांच अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि बिश्नोई गैंग ने इस हत्या की जिम्मेदारी ले ली। बिश्नोई गैंग ने जो धमकी दी थी उसे पूरा कर दिया था। बिश्नोई गैंग के एक गैंगस्टर रोहित गोदारा ने सोशल मीडिया के जरिए हत्या के बाद ये मैसेज दिया।

फिल्म पद्मावत के विरोध से आया चर्चा में 

उल्लेखनीय है कि  साल 2018 में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज हुई और फिल्म की रिलीज से ठीक पहले एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया और वो नाम था सुखदेव सिंह गोगामेड़ी का। करणी सेना ने इस फिल्म का विरोध किया। फिल्म की हीरोइन दीपिका पादुकोण का भी विरोध हुआ। फिल्म को देश के संस्कृति के लिए खतरा बताया गया। इस दौरान सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के बयान काफी चर्चा का विषय रहे। उन्होंने फिल्म को राजूपतों की मर्यादा के खिलाफ बताया और जमकर आवाज उठाई। इतना ही नहीं फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली को गोगामेड़ी ने फिल्म के सेट पर जाकर थप्पड़ तक जड़ दिया था।उस वक्त गोगामेड़ी करणी सेना के प्रमुख तो नहीं थे, लेकिन इस एपिसोड ने उन्हें चर्चा में जरूर ला दिया था।

साल 2019 में मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए एक आंदोलन के दौरान भी गोगामेड़ी का नाम काफी चर्चित रहा। ये आंदोलन सवर्णों को 10 फीसदी रिजर्वेशन की मांग को लेकर था। हालांकि बाद में वो करणी सेना से अलग हो गए और 2021 में उन्होंने राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के नाम से एक अलग दल बनाया। देश की संस्कृति को बचाने के नाम पर लोगों को अपने साथ जोड़ा। बाद में करणी सेना और गोगामेड़ी का दल एक हो गया और फिर चीफ बने सुखदेव सिंह गोगामेड़ी।
 

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