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Sachin Pilot Tonk Seat Updates: टोंक सीट पर फिर कायम रहा सचिन पायलट का जलवा, 29 हजार वोटों से पाई जीत

Sachin Pilot Tonk Seat LIVE Updates: राजस्थान कांग्रेस के चर्चित चेहरे सचिन पायलट ने एक बार फिर टोंक विधानसभा सीट से जीत हासिल कर ली है। उन्होंने भाजपा के अजित सिंह मेहता को 29,475 वोटों से हराया।

Sachin Pilot Tonk Seat Updates: टोंक सीट पर फिर कायम रहा सचिन पायलट का जलवा, 29 हजार वोटों से पाई जीत
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,जयपुरSun, 03 Dec 2023 04:28 PM
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Sachin Pilot Tonk Seat LIVE Updates: राजस्थान कांग्रेस के चर्चित चेहरे सचिन पायलट ने एक बार फिर टोंक विधानसभा सीट से जीत हासिल कर ली है। उन्होंने भाजपा के अजित सिंह मेहता को 29,475 वोटों से हरा दिया। सचिन पायलट को कुल 1 लाख 5 हजार से ज्यादा वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार 75 हजार पर ही रह गए। सचिन पायलट 2018 में भी यहीं से उतरे थे। इस बार उनका मुकाबला भाजपा के अजित सिंह मेहता से था। गुर्जर समार से आने वाले सचिन पायलट का सूबे में बड़ा प्रभाव रहा है।

बीते 5 सालों में वह अशोक गहलोत के मुकाबले खड़े दिखे हैं। सीएम पद की उनकी दावेदारी लगातार रही है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व से इंतजार का ही सबक मिला है। इस बार वह फिर से मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद के साथ चुनाव में उतरे थे। अब उन्होंने खुद को जीत हासिल कर ली है, लेकिन पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी है।

2018 में यहां से 54 हजार वोटों से जीते थे सचिन पायलट

सचिन पायलट ने 2018 में टोंक सीट से 54000 वोटों के अंतर से मुकाबला जीता था। तब उन्हें भाजपा से यूनुस खान ने टक्कर दी थी, जिन्हें वसुंधरा राजे के करीबियों में शुमार किया जाता है। सचिन पायलट का प्रभाव टोंक, दौसा समेत कई जिलों में रहा है। गुर्जर समाज के अलावा अन्य बिरादरी के लोग भी उनके समर्थन में रहे हैं। युवा नेता होने के तौर पर भी उनकी एक लोकप्रियता रही है। हालांकि भाजपा से मुकाबले से पहले उन्हें बीते 5 सालों में कांग्रेस की आतंरिक कलह का ही सामना करना पड़ा है। 

PM मोदी ने कई बार किया था सचिन पायलट का जिक्र

गौरतलब है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच संघर्ष का तो जिक्र पीएम नरेंद्र मोदी ने भी किया था। एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट का निधन हो चुका है, लेकिन कांग्रेस अब भी उन्हें सजा दे रही है। उन्होंने कई बार गुर्जर समाज का जिक्र भी किया था। इस तरह भाजपा ने गुर्जर समाज को लुभाने की कोशिश की है। ऐसे में देखना होगा कि सचिन पायलट अपनी सीट पर कितने अंतर से जीतते हैं और उनके समर्थकों की क्या स्थिति रहती है।

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