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अरावली पहाड़ियों में धड़ल्ले से बन रहे होटल रिसोर्ट, लैंड कन्वर्जन पर रोक लगाने की तैयारी

राजस्थान की 'नई हिल पॉलिसी ड्राफ्ट' में यह बिंदु शामिल किया जा रहा है कि अरावली श्रृंखला (Aravallis) में पहाड़ियों पर नए होटल और रिसोर्ट के लिए लैंड कन्वर्जन नहीं किया जाए। पढ़ें यह रिपोर्ट...

अरावली पहाड़ियों में धड़ल्ले से बन रहे होटल रिसोर्ट, लैंड कन्वर्जन पर रोक लगाने की तैयारी
Krishna Singhवार्ता,उदयपुरSun, 28 Jan 2024 09:44 PM
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अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों पर होटल और रिसोर्ट के निर्माण में तेजी आई है। इससे पारिस्थितिक संतुलन के बिगड़ने का खतरा पैदा होने लगा है। अब राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर तैयार की जा रही 'नई हिल पॉलिसी ड्राफ्ट' में इस मसले को शामिल किया जा रहा है। 'नई हिल पॉलिसी ड्राफ्ट' में यह बिंदु शामिल किया जा रहा है कि अरावली श्रृंखला में पहाड़ियों पर नए होटल और रिसोर्ट के लिए लैंड कन्वर्जन नहीं किया जाए।

उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए )के अध्यक्ष राजेन्द्र भट्ट की अध्यक्ष्ता में यहां आयोजित बैठक में फैसला लिया गया कि इस संबंध में संबंधित ग्राम पंचायतों में भू-रूपांतरण प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी करने के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा जाएगा। भट्ट ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला में पहाड़ियों पर होटल एवं रिसोर्ट बनाने का चलन बढ़ा है जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा होने लगा है। 

नई हिल पॉलिसी में इस बात को गंभीरता से शामिल करते हुए अरावली क्षेत्र में पहाड़ियों पर होटल रिसोर्ट के लिए भूमि रूपांतरण प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है। भट्ट ने कहा कि झीलें उदयपुर की लाइफलाइन है। पहाड़ियों की लगातार कटाई से झीलों का कैचमेंट एरिया प्रभावित हो रहा है, साथ ही झीलों में गिरने वाले छोटे-मोटे नदी-नाले विलुप्त होने के कगार पर हैं। 

उन्होंने कहा कि झीलों में पानी की आवक बनाए रखना भी जरूरी है, इसलिए सिंचाई विभाग से जीटी शीट प्राप्त कर ऐसे नदी नालों को चन्हिति कर उन्हें पुनर्जीवित किया जाए। इन नदी नालों से जुड़ी पहाड़ियां को नो कन्स्ट्रक्शन जोन में रखा जाए ताकि पहाड़ियां को बचाया जा सके और झीलों में पानी की आवक बनी रहे। बैठक में ऐतिहासिक सज्जनगढ़ को केन्द्र मानकर 20 किलोमीटर एरिया में आने वाली पहाड़ियों का सर्वे का दायरा बढ़ाते हुए अब 30 किमी परिधि में आने वाली पहाड़ियों का सर्वे करने का निर्णय किया गया।

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