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तीन राज्य में तीन मुद्दे पड़ गए भारी, MP-छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस यूं ही नहीं हारी

कांग्रेस के लिए MP में चुनाव की पूरी तरह से कमान 78 साल के कमलनाथ और 76 साल के दिग्विजय सिंह संभाल रहे थे। लेकिन बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग और सोशल स्कीम फॉर्मूले का वो तगड़ा जवाब नहीं दे सके।

तीन राज्य में तीन मुद्दे पड़ गए भारी, MP-छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस यूं ही नहीं हारी
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,जयपुरSun, 03 Dec 2023 04:40 PM
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अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। लेकिन इस चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को तीन अहम राज्यों में बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को निराशा हाथ लगी है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ही सरकार थी लेकिन पार्टी को यहां हार का मुंह देखना पड़ा है। मध्य प्रदेश में भी पार्टी जीत का दावा कर रही थी लेकिन यहां भी कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं आया है। इन अहम राज्यों मेें कांग्रेस क्यों हारी? इसपर पार्टी आने वाले समय में जरूर मंथन करेगी। 

लेकिन इन तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की हार की वजह तीन अहम मुद्दों को भी माना जा रहा है। इनमें लाल डायरी, महादेव ऐप और पेपर लीक जैसे कांड भी शामिल हैं। राजस्थान कांग्रेस के ही पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंग गुढ़ा ने दावा था कि लाल डायरी में कांग्रेस के भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा है। छत्तीसगढ़ में महादेव बेटिंग ऐप को लेकर भी काफी हंगाा हुआ। इसके अलावा राजस्थान में पेपर लीक से जुड़ी 8 घटनाएं भी कांग्रेस पर भारी पड़ीं।

MP में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग पड़ी भारी

जातिगत गणना की मांग और कल्याणकारी योजनाएं चलाने के बावजूद कांग्रेस इसे वोट में तब्दील करने में नाकाम रही। बीजेपी ने तीनों ही राज्यों में जीत हासिल की है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में वापसी का सपना संजोए बैठी थी लेकिन यह सपना टूट गया। पार्टी के लिए राज्य में चुनाव की पूरी तरह से कमान 78 साल के कमलनाथ और 76 साल के दिग्विजय सिंह संभाल रहे थे। लेकिन बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग और सोशल स्कीम फॉर्मूले का वो तगड़ा जवाब नहीं दे सके। बीजेपी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के चुनाव में अपनी सारी ताकत झोंक दी। यहां तक कि पार्टी ने अपने सांसद और केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनावी मैदान में उतार दिया। 

कांग्रेस पार्टी ने यहां अपनी 11 गारंटियों पर फोकस करते हुए चुनाव प्रचार किया। माना जा रहा है कि शायद मतदाताओं को कांग्रेस की इन गारंटियों में कुछ नया नजर नहीं आया क्योंकि यहां बीजेपी पहले से ही लोगों को कई सोशल स्कीम देती आ रही है। खास कर बीजेपी की लाडली बहन योजना यहां काफी लोकप्रिय है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीन राज्यों में हार का असर कांग्रेस पार्टी पर पड़ेगा। राहुल गांधी ने इन राज्यो में आक्रामक प्रचार किया था। इतना ही नहीं उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा भी की थी ताकि पार्टी को ग्राउंड लेवल पर मजबूती मिले। कई विशेषज्ञ इन चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रहे हैं। 

राजस्थान कांग्रेस के हाथ से फिसला

तीन राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धुंआधार प्रचार किया और कांग्रेस पर जमकर हमला भी किया। राजस्थान में लाल डायरी का मुद्दा चुनाव से पहले काफी गर्म रहा। राजेंद्र गुढ़ा ने लाल डायरी को लेकर दावा कर दिया कि यह डायरी उन्होंने कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ के घर से ली थी और ऐसा उन्होने अशोक गहलोत के निर्देश पर किया था। हालांकि, पार्टी ने गुढ़ा को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान साइडलाइन नजर आ रहीं भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने चुनाव में बाजी मार ली है। राजस्थान में महिलाओं के प्रति अपराध को लेकर भी अमित शाह और पीएम मोदी ने गहलोत सरकार को खूब घेरा था। 

बघेल सरकार को करप्शन पर घेरा

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का आरोप भूपेश बघेल सरकार को झेलना पड़ा। खासकर भर्तियों में करप्शन के आरोप लगे थे। महादेव बेटिंग ऐप स्कैंडल को बीजेपी ने कांग्रेस से जोड़ा था और दावा किया था कि इसका कांग्रेस पार्टी से कनेक्शन है। 

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