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कौन हैं राजस्थान के सबसे युवा विधायक रवींद्र सिंह भाटी? BJP-कांग्रेस को दी पटखनी

बागी तेवर और देशी कलेवर लेकर राजस्थान के चुनावी रण में उतरे रवींद्र सिंह भाटी ने अपना परचम लहरा दिया है। भाटी ने बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। आइये जानते हैं रवींद्र सिंह भाटी को...

कौन हैं राजस्थान के सबसे युवा विधायक रवींद्र सिंह भाटी? BJP-कांग्रेस को दी पटखनी
Mohammad Azamलाइव हिंदुस्तान,बाड़मेरMon, 04 Dec 2023 09:03 PM
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बागी तेवर और देशी कलेवर लेकर राजस्थान के चुनावी रण में उतरे रवींद्र सिंह भाटी ने अपना परचम लहरा दिया है। भाटी ने बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने यहां से भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों को बुरी तरह हराया है। शिव विधानसभा से जीतने के बाद अब सदन में लोगों की आवाज बनने वाले वह सबसे युवा विधायकों में से एक होंगे। चुनाव जीतने से पहले ही रवींद्र सिंह भाटी पूरे देश में मशहूर हो गए थे। रवींद्र का चुनाव निशान सेब था। चुनाव जीतने के बाद कहा जाने लगा कि मेहनत और जुनून से काम करो तो रेगिस्तान में भी सेब उगाया जा सकता है। इस बात को रवींद्र भाटी ने सच कर दिखाया है। आइये जानते हैं कि इतनी कम उम्र में विधायक बनने वाला यह 'लड़ाका' आखिर कौन है...

साल 2019 का वक्त था जब जोधपुर की जय नारायण विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव जोर शोर से शुरू होन वाला था। इस चुनाव में बाड़मेर के दुधौड़ा गांव के रहने वाले एक लड़के रवींद्र सिंह भाटी की भी लड़ने की इच्छा थी। चुनाव लड़ने के लिए रवींद्र ने भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद( एबीवीपी) से टिकट मांगा, लेकिन टिकट किसी और को मिल गया। टिकट नाम मिलने पर बगावती तेवर वाले रवींद्र ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। जेएनवीयू के चुनाव में जीत के बाद रवींद्र चर्चा में आ गए। चर्चा में आने के बाद रवींद्र की राजनीतिक हसरतें भी बढ़ने लगीं। मुख्य धारा की राजनीति में आने के लिए रवींद्र ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी चुनी।

दोबारा नहीं मिला टिकट
जेएनवीयू के छात्र संघ अध्यक्ष बनने के बाद के दिनों में भाटी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय चेहरा बन चुके थे। भाजपा से जुड़ चुके भाटी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बाड़मेर की शिव विधानसभा से पार्टी का टिकट मांगा। भाजपा ने इस सीट से भाटी को टिकट ना देकर स्वरूप सिंह खारा पर भरोसा जताया। टिकट नाम मिलने से नाराज रवींद्र भाटी ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। रवींद्र भाटी ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में जमकर प्रचार किया। भाटी की मेहनत रंग लाई। तीन दिंसबर को जब 'किस्मत का डब्बा' खुला तो भाटी ने शिव से चुनाव जीत लिया था।

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