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Rajasthan politics: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की कार्यशैली पर क्यों उठे सवाल ? इनसाइड स्टोरी 

राजस्थान में बीजेपी के दो बड़े नेताओं के बीच सियासी घमासान ने पार्टी में एकता की पोल खोल दी है। लोकसभा चुनाव से पहले हो रही बयानबाजी से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को नुकसान हो सकता है।

Rajasthan politics: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की कार्यशैली पर क्यों उठे सवाल ? इनसाइड स्टोरी 
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरWed, 28 Feb 2024 08:18 AM
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राजस्थान में  केंद्रीय मंत्री बने गजेंद्र सिंह शेखावत एक बार फिर चर्चा में है। शेखावत पर उन्हीं की पार्टी के बीजेपी विधायक ने  गंभीर आरोप लगाए है। विधायक बाबू सिंह राठौड़ ने कहा कि शेखावत ने काम नहीं किए है। सिर्फ वादें किए है। शेरगढ़ विधायक ने कहा कि शेखावत सीकर के मेहरौली के रहने वाले है। इसलिए जोधपुर में काम करना पसंद नहीं करते है। इसके जवाब कें शेखावत ने अपने काम गिना दिए। जबकि विधायक बाबूसिंह का  कहना है कि जो बताया है वह दिख नही रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान के दो बड़े राजपूत नेताओं की टकराहट से बीजेपी के नुकसान हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार टकराहट की वजह है शेखावत द्वारा खुद को राजस्थान बीजेपी में सीएम भजनलाल के बाद नंबर 2 बनने की कवायद की कोशिश। ईआरसीपी को लेकर जिस तरह से शेखावत पूर्वी राजस्थान में दौरे कर खुद को बड़ा नेता घोषित किया है, उससे वसुंधरा राजे कैंप के नेता नाराज बताए जा रहे हैं। बता दें जोधपुर के शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह राठौड़ वसुंधरा राजे कैंप के विधायक माने जाते है। शेरगढ़ से कई बार विधायक बने है। माना यहीं जा रहा है कि बाबूसिंह राठौड़ शेखावत की वजह से ही मंत्री नहीं बन पाए है। इसलिए नाराज है। हालांकि, बाबूसिंह राठौड़ ने इन बातों का जिक्र नहीं किया है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गजेंद्र सिंह शेखावत राजस्थान में हमेशा में चर्चा में रहते है। गहलोत सरकार के समय में भी चर्चा में थे। भजनलाल सरकार के समय भी सुर्खियों में रह रहे हैं। सीएम फेस को लेकर जिस तरह से गजेंद्र सिंह शेखावत ने वसुंधरा राजे के नाम का विरोध किया था। यही उसी का नतीजा है। आने वाले दिनों में राजस्थान बीजेपी में टकराहट बढ़ सकती है। राजस्थान में वसुंधरा राजे गुट के नेता फिलहाल खामोश है। वक्त का इंतजार कर रहे है। सियासी जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे गुट के नेताओं का मानना है कि शेखावत के वजह से ही वह सीएम नहीं बन पाई है। फिलहाल दोनों नेताओं की बीच बढ़ती टकराहट का खामियाजा बीजेपी को जोधपुर में उठाना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव में माना जा रहा है कि गजेंद्र सिंह शेखावत ही जोधपुर से बीजेपी के प्रत्याशी होंगे। ऐसे में इस बार शेखावत की राह आसान होती दिखाई नहीं दे रही है। बाबूसिंह राठौड़ कद्दावर नेता माने जाते है। 

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