राजस्थान: कांग्रेस के लिए संगठन विस्तार बना चुनौती, पायलट समझौत करने के मूड में नहीं

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए संगठन का विस्तार करना चुनौती बना हुआ है। डोटासरा अपने करीब 2 वर्ष के कार्यकाल में मात्र 13 जिला अध्यक्ष बना पाए है। गहलोत-पायलट की खींचतान और वरिष्ठ...

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लाइव हिंदुस्तान , जयपुर Prem Meena
Last Modified: Sun, 23 Jan 2022 1:34 PM

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए संगठन का विस्तार करना चुनौती बना हुआ है। डोटासरा अपने करीब 2 वर्ष के कार्यकाल में मात्र 13 जिला अध्यक्ष बना पाए है। गहलोत-पायलट की खींचतान और वरिष्ठ नेताओं के टकराव की वजह से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। जबकि विधानसभा चुनाव के लिए 22 महीने ही बचे हैं। अपने दो वर्ष के कार्यकाल में पीसीसी चीफ डोटासरा कांग्रेस संगठन के 42 में से 13 ही जिला अध्यक्ष और दो प्रवक्ता ही बना पाए है। डोटासरा नियुक्ति के माममे में प्रदेश प्रभारी अजय माकन से कई दौर की वार्ता भी कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि पीसीसी चीफ पुराने चेहरों को दोबारा मौका देने के पक्ष में नहीं है। नए चेहरों को जिला अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। पायलट कैंप इस बात पर अड़ा हुआ है कि पुराने चेहरों का लाभ भी संगठन में लिया जाए। पायलट कैंप समझौता करने के मूड में बिलकुल भी तैयार नहीं है। प्रदेश प्रभारी अजय माकन भी फिलहाल वेट एंड वाच की स्थिति में है।

पायलट की बगावत पर कर दिया था भंग

पिछले साल पायलट कैंप की बगावत के चलते पार्टी हाईकमान कांग्रेस संगठ की सभी जिला इकाइयों और ब्लाक कमेटियों को भंग कर दिया गया था। तभी से खाली पद चल रहे हैं। पायलट की जगह नए पीसीसी चीफ बनाए गए गोविंद सिंह डोटासरा अपने करीब 2 वर्ष के कार्यकाल में जिला अध्यक्षों और ब्लाक कमेटियों के खाली पदों को भरने में विफल रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि पीसीसी चीफ डोटासरा को वरिष्ठ नेताओं के बीच खींचतान की वजह से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करने में परेशानी हो रही है। डोटासरा ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को नाम भेजने के निर्देश दिए। डोटासरा को नाम भी मिल गए है, लेकिन सहमति नहीं बन पाने का कारण जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

संगठन कमजोर होने का उठाना पड़ सकता है नुकसान

राज्य में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य की मुख्य विपक्षा पार्टी भाजपा मिशन 2023 के मोड पर है। जिला स्तर पर कांग्रेस का संगठन मजबूत नहीं है। इसके पीछे प्रमुख वजह जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पाना बताया जा रहा है। पहले प्रदेश कांग्रेस संगठन में 39 जिला अध्यक्ष बनते थे। अब जिला अध्यक्षों की संख्या 39 से बढ़ाकर 42 कर दी गई है। जिनमें से केवल 13 जिला अध्यक्ष ही बनाए गए हैं। 29 जिला अध्यक्षों की घोषणा करना बाकी है। पार्टी हाईकमान ने पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं के बीच टकाराव टालने के लिए जयपुर, जोधपुर और कोटा के लिए दो-दो शहर अध्यक्ष बनाने की घोषणा की है।

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