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Hindi News राजस्थानक्या सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से गुर्जर बेल्ट में कांग्रेस को होगा नुकसान?

क्या सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से गुर्जर बेल्ट में कांग्रेस को होगा नुकसान?

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनते देखने की उम्मीद में पूरे गुर्जर बेल्ट ने आंख बंदकर कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था। इस चुनाव में कांग्रेस से आठ गुर्जर MLA चुने गए

क्या सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से गुर्जर बेल्ट में कांग्रेस को होगा नुकसान?
Swati Kumariलाइव हिंदुस्तान,जयपुरWed, 22 Nov 2023 05:14 PM
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Rajasthan Elections 2023:  राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता वापसी के जोर लगा रही है। वहीं, कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे कलह का फायदा उठाने के लिए बीजेपी भी ऐड़ी-चोरी का जोर रही है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनते देखने की उम्मीद में पूरे गुर्जर बेल्ट ने आंख बंदकर कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था। इस चुनाव में कांग्रेस से आठ गुर्जर एमएलए चुने गए थे जबकि बीजेपी से एक भी नहीं जीत पाया था। ऐसे में बीजेपी काफी लंबे समय से इस प्लान पर काम कर रही है। इसी क्रम में इस जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीलवाड़ा में गुर्जर देवता देवनारायण के 1111वें 'अवतरण महोत्सव' के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। 

वहीं, इस बार के चुनाव में दोनों पार्टियों ने लगभग बराबर गुर्जर उम्मीदवारों को टिकट दिया है। बीजेपी से 10 और कांग्रेस से 11 गुर्जर उम्मीदवार हैं। ये सारा वो इलाका है, जहां सचिन पायलट और उनके परिवार का प्रभाव गुर्जरों के अलावा अन्य समुदायों पर भी दिखता रहा है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस बार गुर्जर बेल्ट में खासकर पूर्वी राजस्थान में बीजेपी की उम्मीदें ज्यादा हैं। इसकी वजह कांग्रेस के प्रति गुर्जरों के एक वर्ग की भारी नाराजगी है। ऐसे में गुर्जर बेल्ट को लेकर बीजेपी का आत्मविश्वास बढ़ा है। वहीं, पायलट परिवार के गढ़ माने जाने वाले दौसा के मित्रपुरा का एक गुर्जर परिवार कांग्रेस से 2018 में जीत के बाद पायलट की 'बेइज्जती' का बदला लेने की बात कह रहा है। तब पायलट कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे और पार्टी की जीत में उनका अहम रोल माना जाता है। एक बीजेपी नेता ने पार्टी की रणनीति के बारे बताते हुए कहा, 'पार्टी साफ-सुथरी छवि के साथ समुदाय तक पहुंचने का प्रयास कर रही है और यह नतीजों में नजर आएगा।'  

राजस्थान के 52 साल के सुमेर सिंह गुर्जर ने कहा, 'हमने कांग्रेस को तन,मन,धन से वोट दिया। पर उन्होंने पायलट के साथ दगा कर।' गौरतलब है कि पायलट की वजह से इलाके में कांग्रेस को इतना समर्थन मिला था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (मीणा) के उम्मीदवारों की भी जीत हुई थी। जबकि मीणा (एसटी) और गुर्जर परंपरागत तौर पर विरोधी माने जाते हैं। लेकिन, आज की परिस्थितियां बदली हुई हैं। वहीं, दौसा के खेरली गांव में पिता-बेटे निहाल सिंह गुर्जर और अजय सिंह गुर्जर ने कहा कि अगर गहलोत और पायलट के बीच 2.5-2.5 साल सीएम बनाने का फॉर्मूला लागू किया होता तो कांग्रेस को फायदा मिल सकता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, निहाल ने कहा कि इस बार वे मंत्री और सिकराय से कांग्रेस की उम्मीदवार ममता भूपेश (SC की उम्मीदवार) को वोट नहीं करेंगे। फिर चाहे खुद सचिव पायलट ही उनके लिए प्रचार करने क्यों ना आ जाएं। उनका कहना है, 'वह पायलट को 'नकारा निकम्मा' कहने की वजह से कांग्रेस को 'सबक' सिखाना चाहते हैं।' मालूम हो कि खुद सीएम गहलोत पायलट के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कई बार कर चुके हैं। 

उधर, बीजेपी ने गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा के बेटे को टिकट दिया है। ऐसे में बीजेपी को यहां बदलाव की हवा की उम्मीद है। यहां बीजेपी ने दौसा से सटे टोंक जिले की देवली उनियारा से विजय बैंसला को टिकट दिया है। बैंसला गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे हैं, जिनका गुर्जरों में बड़ा जनाधार रहा है।