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क्या है राजस्थान चुनाव की वर्तमान स्थिति? मारवाड़-हाड़ौती में कांटे की टक्कर; इस रीजन में कांग्रेस मजबूत

राजस्थान में चुनाव प्रचार चरम पर है। 25 नवंबर को वोटिंग है। इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। छह रीजन में शेखावाटी में कांग्रेस तो मेवाड में बीजेपी मजबूत दिखाई दे रही है।

क्या है राजस्थान चुनाव की वर्तमान स्थिति? मारवाड़-हाड़ौती में कांटे की टक्कर; इस रीजन में कांग्रेस मजबूत
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरFri, 17 Nov 2023 08:35 AM
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राजस्थान में चुनाव प्रचार चरम पर है। 25 नवंबर को वोटिंग है। इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। छह रीजन में सीटों के बंटवारे के पिछले आंकड़ों की तुलना करें तो अबकी बार मेवाड़ और हाड़ौती में बीजेपी के आगे बढ़ने की संभावना है। जबकि पूर्वी राजस्थान में बीजेपी इस कांग्रेस को चुनौती देती हुई नजर आ रही है। शेखावाटी अंचल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। मारवाड़ में पिछले चुनाव जैसी ही स्थिति रहने की संभावना है। 

मेवाड़-वागड़ में बीजेपी की बढ़त 

मेवाड़ वागड़ अंचल की बात की जाय तो इसमें कुल 28 सीटें आती हैं। राजनीतिक तौर पर इस अंचल का गठन उदयपुर की 8, राजसमंद की 4, चित्तौड़गढ़ की 5, प्रतापगढ़ की 2, बांसवाड़ा की 5 और डुंगरपुर की 4 सीटों से होता है. इसमें उदयपुर में 5, डुंगरपुर में 4, प्रतापगढ़ में 2, बांसवाड़ा में 5 सीटे अनुसूचित जनजाति (ST) और चित्तौड़गढ़ की एक सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई थी। माना जा रहा है कि इस बार बीजेपी मेवाड़ृ-वागड़ में बंपर जीत हासिल कर सकती है। हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेता गुलाब चंद कटारिया की वजह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कटारिटया ने नेता प्रतिपक्ष थे, लेकिन बाद में उन्हें असम का राज्यपाल बना दिया।मेवाड में बीटीपी और बाप पार्टी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। विधानसभा चुनाव 2018 में बीटीपी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन कांग्रेस को सियासी तौर पर बहुत डैमेज किया था। इस बार बीटीपी में दो फाड़ हो गई। विधायक राजकु्मार रोत औऱ रामप्रसाद ने भारतीय आदिवासी पार्टी यानी बाप का गठन कर लिया। सियासी जानकारों का कहना है कि बीटीपी की फूट का कांग्रेस को लाभ मिल सकता है। 

शेखावाटी अंचल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में 

सियासी जानकारों का कहना है कि शेखावाटी में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सीकर के लक्ष्मणगढ़ से चुनाव लड़ रहे है। जबकि नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ चूरू की तारानगर से मुकाबले में है। शेखावाटी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। इस बार कांग्रेस ने तारानगर में राहुल गांधी की जनसभा करवाकर बीजेपी पर बढ़त बना ली है। शेखावाटी में सीकर, चुरू और झुंझुनूं समेत तीन जिले आते हैं। यहां विधानसभा की 21 सीटें हैं। चुरू जिले में 6 सीटें आती हैं, इनमें चूरू, सुजानगढ़, सरदारशहर, रातनगढ़, तारानगर और सादुलपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। झुंझुनूं जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें खेतड़ी, मंडावा, झुंझुनूं, नवलगढ़, उदयपुरवाटी, पिलानी और सूरजगढ़ शामिल हैं। इसी तरह सीकर जिले में आठ विधानसभा सीटें हैं। इनमें नीमकाथाना, दांतारामगढ़, लक्ष्मणगढ़, खंडेला, सीकर, धोद, श्रीमाधोपुर और फतेहपुर विधानसभा सीट है। विधानसभा चुनाव  2018 में भाजपा को शेखावाटी क्षेत्र की 21 सीटों में से सिर्फ चार सीटों पर ही जीत मिली थी। एक सीट बसपा और एक सीट निर्दयलीय विधायक के खाते में गई थी। सबसे ज्यादा 15 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। 

वसुंधरा राजे और ओम बिरला के क्षेत्र में बीजेपी मजबूत 

राजस्थान का हाड़ौती इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। पिछले 30 में साल से बीजेपी कांग्रेस के आगे रहती आई है। इस बार गहलोत के यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कोटा में विकास कार्य खूब करवाए है, इसके वावजूद भी वह कड़े मुकाबले में फंसे हुए है। सियासी जानकारों का कहना है कि आरएससए के प्रभाव की वजह से बीजेपी को हर बार फायदा मिलता है। हाड़ौती संभाग में कुल 4 जिले आते हैं, जिनमे कोटा-बूंदी (2 जिले और 1 संसदीय क्षेत्र) और बारां-झालावाड़ (2 जिले और 1 संसदीय क्षेत्र) हैं. इन 4 जिलों की 17 विधानसभा सीटें हैं। हाड़ौती के 4 जिलों की 2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 17 सीटों में से भाजपा ने 10 और कांग्रेस ने 7 पर जीत दर्ज की। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का झालावाड़ और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसी रीजन से आते हैं। इस बार बीजेपी यहां मबजूत स्थिति में है।ॉ

गहलेत के जोधपुर में  कांग्रेस-बीजेपी के बीच मुकाबला 

सियासी जानकारों का कहना है कि जोधपुर संभाग की लगभग 33 सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला है। मारवाड़ रीजन में जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली आदि जिले आते हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली थी। सीएम अशोक गहलोत जोधपुर से आते हैं। इस बार बीजेपी ने बाड़मेर में पीएम मोदी सभा करवाकर कांग्रेस पर शुरुआती बढ़त बना ली है। पिछले चुनाव में बाड़मेर की 10 में से 9 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस बार कांटे का मुकाबला है। हालांकि, हनुमान बेनीवाल की पार्टी ने बाड़मेर की ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। कांग्रेस के बड़े नेता हरीश चौधरी बाड़मेर की बायतू से चुनाव लड़ रहे हैं। 

ढूंढाण में सचिन पायलट की प्रतिष्ठा दांव पर 

ढूंढाड़ रीजन में विधानसभा की 58 सीटें आती हैं। राज्य के इस हिस्से में मिश्रित आबादी है। इस हिस्से की सीमा यूपी, एमपी और हरियाणा से लगती है।जयपुर समेत शहरी सीटों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में आता है। यहां मुस्लिम और एससी आबादी अच्छी खासी है। इस रीजन में हिंदुत्व और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बड़े मुद्दे हैं। इस बार कांग्रेस के लिए यहां समस्या ये है कि सचिन पायलट, जो ढूंढार से आते हैं। पूर्वी राजस्थान के अलवर, भरतपुर, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर, जयपुर, करौली और धौलपुर ढूंढाण में आते हैं।  पिछली बार कांग्रेस को सफलता मिली थी। इस बार कहीं बीएसपी कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है। बीएसपी ने मुकाबले को कई सीटों पर त्रिकोणिय बना दिया है। सचिन पायलट टोंक से चुनाव ल़ड़ रहे हैं। पायलट के कहने पर गुर्जर वोटर्स कांग्रेस के पक्ष में लामबंद हो सकते है। 

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