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चित्तौड़गढ़ सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय, बागी चंद्रभान सिंह आक्या ने बढ़ा दी BJP की टेंशन, समझें कैसे

चुनाव में चित्तौड़गढ़ सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने यहां चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।

चित्तौड़गढ़ सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय, बागी चंद्रभान सिंह आक्या ने बढ़ा दी BJP की टेंशन, समझें कैसे
Mohammad Azamवार्ता,जयपुरSun, 19 Nov 2023 05:26 PM
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राजस्थान में 25 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में चित्तौड़गढ़ सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। चित्तौड़गढ़ सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने यहां चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र जहां इस बार लगभग दो लाख सत्तर हजार मतदाता हैं और चुनावी मैदान में आठ प्रत्याशी है लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार नरपत सिंह राजवी और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के बीच होना था। इस बीच भाजपा के ही बागी दो बार के विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भी पर्चा भर दिया है। आक्या के आने से भाजपा की टेंशन बढ़ गई है। ये तीनों उम्मीदवार इस सीट से दो दो बार विधायक रह चुके हैं। 

भाजपा प्रत्याशी नरपत राजवी वर्ष 1993 में सरकारी नौकरी छोड़ राजनेता बने और यहां से विधायक चुने गये। बाद में 2003 में भी यहीं से विधायक चुने गए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत 1998 और 2008 में जबकि चंद्रभान सिंह आक्या साल 2013 से अब तक विधायक हैं। नरपत सिंह राजवी को पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत का दामाद और पूर्व मंत्री होने के चलते कद्दावर नेता माना जाता है। इसी तरह सुरेंद्र सिंह जाड़ावत की भी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की गिनती की जाती है। कांग्रेस प्रत्याशी जाड़ावत के पिछले विधानसभा चुनाव के साथ ही लगातार दो हार के बाद भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया। इनमें आक्या मतदाताओं के बीच आज कहीं ज्यादा लोकप्रिय हैं। इसी लोकप्रियता के बल पर वह पार्टी के दबाव में नहीं आये और उन्होने निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है।

चंद्रभान आक्या के समर्थन में चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र में संगठन स्तर पर भाजपा के सैंकड़ों पदाधिकारियों जनप्रतिनिधियों के साथ हजारों की संख्या में कार्यकर्ता पार्टी और वोटर भी मुखर होकर उनके साथ आ जाने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया। इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी रोचकता यह है कि अमूमन हर चुनाव के दौरान प्रमुख उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने के लिए अलग- अलग तरह के प्रलोभन देते रहते हैं लेकिन इस बार चुनाव में तीनों ही उम्मीदवारों को जनता बिना किसी प्रलोभन के परख रही है। 

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