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Hindi News राजस्थानRajasthan Election: कांग्रेस के पोस्टरों में सचिन पायलट की वापसी? सियासी मजबूरी या रणनीति 

Rajasthan Election: कांग्रेस के पोस्टरों में सचिन पायलट की वापसी? सियासी मजबूरी या रणनीति 

राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की पोस्टरों की वापसी हो गई है। कांग्रेस की 7 गारंटी के पोस्टरों में सचिन पायलट और गहलोत एक साथ दिखाई दे रहे हैं। जानकार अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं।

Rajasthan Election: कांग्रेस के पोस्टरों में सचिन पायलट की वापसी? सियासी मजबूरी या रणनीति 
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरWed, 15 Nov 2023 06:41 AM
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राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की पोस्टरों की वापसी हो गई है। कांग्रेस की 7 गारंटी के पोस्टरों में सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत एक साथ दिखाई दे रहे हैं। राजधानी जयपुर में ऐसे पोस्टरों को भरमार है। जगह-जगह गहलोत-पायलट दिखाई दे रहे। चुनाव से ठीक पहले पोस्टरों में सचिन पायलट की वापसी के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे है। उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट के जन्मदिन पर राजधानी जयपुर में लगे पोस्टरों को हटाने पर विवाद खड़ा गया था। पायलट समर्थक विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने सीधे तौर पर सीएम अशोक गहलोत के इशारें पर पोस्टर हटाने का आरोप लगाया था। इसके बाद पायलट के पोस्टर जयपुर में बहुत कम दिखाई दिए थे। लेकिन वोटिंग से ठीक पहले सचिन पायलट की पोस्टरों में वापसी के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सचिन पायलट का 40 सीटों पर सीधा असर है। राज्य के करीब 9 फीसदी गुर्जर वोट को साधने के लिए कांग्रेस किसी भी प्रकार की चूक नहीं करना चाहती है। इसलिए गृह लक्ष्मी योजना के पोस्टरों में गहलोत और पायलट के पोस्टर एक साथ दिखाई दे रहे हैं। 

सचिन पायलट अपने समर्थकों तक सीमित

सियासी जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट की कांग्रेस अनदेखी नहीं कर सकती है। पायलट का 200 विधानसभा सीटों में से करीब 40 सीटों पर सीधा असर है। गुर्जर वोर्टर पर सीधी पकड़ है। इस बार कांग्रेस के रणनीतिकारों ने राजस्थान में गहलोत-पायलट की रैली के लिए अलग-अलग कार्यक्रम तय किए है। सीएम गहलोत के प्रभाव वाले इलाकों में सचिन पायलट की रैली या जनसभा नहीं है। इसी तरह सचिन पायलट के इलाकों में गहलोत का चुनावी कार्यक्रम नहीं है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से ऐसा कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया है। लेकिन सचिन पायलट ने अभी तक दो-चार जनसभाएं की है। वे सब पायसट समर्थक माने जाते हैं। जैसे परबतसर और लाडनूं में नामांकन पत्र दाखिल करते समय जो सभाएं की है, वे पायलट के समर्थक है। परबतसर विधायक रामनिवास गांवड़िया और लाडनूं विधायक मुकेश भाकर पायलट समर्थक माने जाते हैं। पायलट अपने साथ गुड़गांव जाने वाले सभी 19 विधायकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं

पायलट झुकने के लिए तैयार नहीं 

राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान है। वहीं, 3 दिसंबर को परिणाम सामने आएंगे। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट की अनदेखी नहीं करना चाहता है। पायलट को स्टार प्रचारक बनाया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव बाद सचिन पायलट एक बार फिर बड़ी भूमिका में आ जाएंगे। पायलट इशारों में संकेत दे चुके हैं कि उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई है। युवाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे। बता दें पायलट ने सीएम गहलोत से पेपर लीक से पीड़ित युवाओं को मुआवजा देने की मांग की थी। फिलहाल पायलट कैंप को रिजल्ट का इंतजार है।