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राजस्थान में कायम रहा रिवाज, भाजपा 115 सीटों के साथ बनाएगी सरकार, 69 पर सिमटी कांग्रेस

rajasthan vidhan sabha election result 2023: राजस्थान में बारी बारी से पार्टियों को मौका देने का रिवाज इस बार भी कायम रहा। भाजपा सूबे में सरकार बनाने जा रही है जबकि कांग्रेस को मायूसी हाथ लगी है।

राजस्थान में कायम रहा रिवाज, भाजपा 115 सीटों के साथ बनाएगी सरकार, 69 पर सिमटी कांग्रेस
Krishna Singhभाषा,जयपुरMon, 04 Dec 2023 01:08 AM
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राजस्थान की आवाम ने इस बार के विधानसभा चुनाव में हर पांच साल में सरकार बदलने के रिवाज को कायम रखते हुए 'राज' यानी सरकार को बदल दिया है। सूबे से कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की विदायी हो गई है। राजस्थान की 200 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 115 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस 69 सीटों पर सिमट गई है। सूबे में आठ निर्दलियों ने भी बाजी मारी है। इनमें अधिकांश बागी हैं। तीन सीटों पर भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं जबकि बसपा के खाते में दो सीटें गई हैं।

राजस्थान में दलवार स्थिति 
पार्टी            सीट
भाजपा            115
कांग्रेस            69
निर्दलीय            08
भाआपा            02
बसपा            02
रालोद            01
राष्ट्रीय लोकतंत्रिक पार्टी        01
 

गहलोत ने मानी हार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनादेश स्वीकार हुए इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। गहलोत ने पूरे नतीजे आने से कुछ घंटे पहले ही हार स्वीकार कर ली और सोशल मीडिया पर लिखा- राजस्थान की जनता के जनादेश को हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। यह सभी के लिए अप्रत्याशित नतीजे हैं। यह हार दिखाती है कि हम अपनी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में कामयाब नहीं रहे हैं। 

भाजपा के आक्रामक अभियान का कमाल
चुनावी विश्लेषकों की मानें तो गहलोत सरकार की कल्याणकारी योजनाएं प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाले भाजपा के आक्रामक अभियान के सामने विफल रहीं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन की जीत है। 

भाजपा के दिग्गज जीते
भाजपा के जीतने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (झालरापाटन), लोकसभा सदस्य राज्यवर्धन राठौड़ (झोटवाड़ा), बाबा बालक नाथ (तिजारा) व दीया कुमारी (विद्याधर नगर) शामिल हैं। भाजपा के हारने वाले प्रमुख नेताओं में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनियां शामिल हैं। 

कांग्रेस के इन दिग्गजों ने मारा मैदान
वहीं, कांग्रेस से मुख्यमंत्री गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जीत गए हैं। कांग्रेस के हारने वाले नेताओं की लंबी सूची में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, मंत्री  गोविंद मेघवाल, भंवर सिंह भाटी (कोलायत), विश्वेंद्र सिंह (डीग कुम्हेर), सालेह मोहम्मद (पोकरण), उदयलाल आंजना (निम्बाहेड़ा) एवं प्रताप सिंह खाचरियावास (सिविल लाइंस) का नाम शामिल है।

मत प्रतिशन में दो फीसदी का अंतर
मत प्रतिशत के मामले में भाजपा और कांग्रेस को मिले कुल मतों में लगभग दो प्रतिशत का अंतर रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को 41.69 प्रतिशत जबकि कांग्रेस को 39.53 फीसदी वोट मिले। हालांकि गत विधानसभा चुनाव में यह अंतर एक फीसदी से भी कम का था। 

वसुंधरा राजे दावेदारों में शुमार
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा अगले मुख्यमंत्री के रूप में किसे चुनेगी। अभियान के दौरान, PM मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी का चुनाव चिन्ह 'कमल' ही उसका चेहरा होगा। झालरापाटन विधानसभा सीट से जीतने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस पद के प्रमुख दावेदारों में शुमार हैं।

सीएम पद की कतार में ये नेता
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ झोटवाड़ा विधानसभा सीट से जीते हैं। उन्हें भी संभावित दावेदार बताया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नेताओं में से एक माने जा रहे हैं। उन्होंने गहलोत पर कटाक्ष करते हुए कहा- जादूगर की जादूगरी समाप्त हो गई।

गुटबाजी से डूबी कश्ती
सूबे में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने भीतर गुटबाजी से जूझ रहे थे, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इसे थाम लिया जबकि कांग्रेस इसमें नाकाम रही। गहलोत और पायलट की अंदरूनी कलह ज्यादा खुलकर सामने आई। हालांकि चुनावों के बीच पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों के बीच समझौता सुनिश्चित कराया था।

भाजपा के हमले अचूक
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। वहीं कांग्रेस ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं को पेश करने के अलावा पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को एक प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश की।  

जीत ली सेमीफाइनल की जंग
आगामी 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले इस मुकाबले को सेमीफाइनल बताया जा रहा था। इसमें भाजपा ने मैदान मार लिया है। बीते कुछ दशकों में, परंपरागत रूप से राजस्थान में हर विधानसभा चुनाव में सरकार बदल जाती है। एक बार कांग्रेस, एक बार भाजपा की सरकार आती रही है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। राजस्थान की 200 में से 199 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान हुआ था जिसमें 75.45 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे। करणपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव स्थगित किया गया है।

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