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हिंदी न्यूज़ राजस्थानगहलोत और पायलट के बीच हुए सुलह के फाॅर्मूले की राह कठिन ! , इनसाइड स्टोरी

गहलोत और पायलट के बीच हुए सुलह के फाॅर्मूले की राह कठिन ! , इनसाइड स्टोरी

राजस्थान कांग्रेस में कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद भले ही 'आल इज वेल' की बात कही जा रही है, लेकिन यह यक्ष प्रश्न है कि यह गहलोत-पायलट के बीच सुलह का फॉर्मूला कितने दिन टिक पाएगा।

गहलोत और पायलट के बीच हुए सुलह के फाॅर्मूले की राह कठिन ! , इनसाइड स्टोरी
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरWed, 30 Nov 2022 01:07 PM
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राजस्थान कांग्रेस में कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद भले ही 'आल इज वेल' की बात कही जा रही है। लेकिन यह यक्ष प्रश्न है कि यह गहलोत-पायलट के बीच सुलह का फॉर्मूला कितने दिन टिक पाएगा। क्योंकि पहले भी दोनों नेताओं में सुलह कराई गई थी। लेकिन पायलट सीएम पद से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है, जबकि सीएम गहलोत सीएम की कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। दोनों अड़े हुए है। लेकिन जिस तरह जयपुर आए संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल मंगलवार शाम को सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट को लेकर बाहर आए, उनका हाथ पकड़ कर उठाया और कहा, 'दिस इज दी राजस्थान कांग्रेस'। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि समझौते की राह कठिन है। पहले भी समझौते कराए, लेकिन सफल नहीं रहे। इससे पहले भी कम से कम तीन बार यह कोशिश हो चुकी है। लेकिन कुछ दिन बाद फिर दोनों नेता पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। बयानबाजी और एक दूसरे को नीचा दिखाने का काम शुरू हो जाता है। पायलट की बगावत के समय प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय पर आऱोप लगे। फिर अजय माकन पर आऱोप लगे। चार साल से राजस्थान कांग्रेस में यही होता चला आ रहा है। 

पायलट कैंप चुप बैठने के मोड़ पर नहीं 

जानकारों का कहना है कि सचिन पायलट बहुत दिन तक चुप नहीं रहेंगे। सचिन पायलट रणनीति के तहत चुप रहेंगे। लेकिन अपने समर्थकों को सीएम गहलोत के खिलाफ बोलने का इशारा जरूर करेंगे। जो कि पायलट चार साल से करते आ रहे हैं। बता दें, पायलट ने जुलाई 2020 में फिर बगावत कर दी थी। वो अपने खेमे के 18 विधायकों को लेकर हरियाणा के एक रिसार्ट में चले गए। 34 दिनों तक वो वहीं जमे रहे। सीएम गहलोत का आरोप है कि बीजेपी उनको हवा दे रही है। सीएम गहलोत ने हाल ही में सचिन पायलट को गद्दार बताया था। इसके पीछे वजह भी बताई। सीएम ने कहा कि अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र राठौड़ के इशारे पर पायलट ने गुड़गांव में बाड़ेबंदी की। सब जानते है कि धर्मेंद्र प्रधान बाडे़बंदी में आते थे। कुछ विधायकों ने अमित शाह के आवास पर ठहाके लगाए थे। अमित शाह को मिठाई भी खिलाई। हालांकि, सचिन पायलट ने आज तक इन आरोपों का जवाब नहीं दिया है। लेकिन पायलट समर्थक माने जाने वाले मंत्री मुरारी लाल मीना ने सीएम गहलोत के इन आरोपों को खारिज किया है। मंत्री मुरारी लाल का कहना है कि सीएम गहलोत को सबूत देना चाहिए। पायलट ने कोई बगावत नहीं की। अपनी मांगों को के लिए बाड़ेबंदी करना बगावत नहीं कहा जा सकता है।

पायलट की मांग पर बनाई कमेटी का अता पता नहीं 

बगावत के बाद चर्चा है कि प्रियंका गांधी के कहने पर पालयट जयपुर लौट थे। 10 अगस्त 2020 को गहलोत और पायलट खेमे में सुलह की खबर आ गई। समस्या के समाधान के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। कमेटी का क्या हुआ पता नहीं। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने पायलट से उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया। पायलट कैंप के नेताओं का कहना है कि दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 100 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री भी पद पर दावेदारी की थी। पायलट समर्थकों का कहना है कि चुनाव उनकी अध्यक्षता में लड़ा गया है, इसलिए मुख्यमंत्री उन्हें ही बनाया जाना चाहिए।  पायलट की बगावत के बाद अजय माकन को राजस्थान का प्रभारी बनया। लेकिन माकन ने इस्तीफा दे दिया। माकन पर पायलट का पक्ष लेने के आरोप लगे। 

25 सितंबर को पायलट के लिए बनी बात

उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर को चर्चा थी कि सचिन पायलट को सीएम बनाने का प्रस्ताव लेकर अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे जयपुर आए। लेकिन गहलोत समर्थकों ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया। पायलट ने इस पर एतराज जताते हुए गहलोत समर्थक मंत्रियों शांति धारीवाल और महेश जोशी पर ऐक्शन की मांग कर डाली। लेकिन फिलहाल इस मांग को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। बता दें,  सिंतबर में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। गहलोत प्रमुथ दावेदार बनकर उभरे। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे और प्रभारी महासचिव अजय माकन पर्यवेक्षक बनकर जयपुर पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। गहलोत खेमे को लगा कि आलाकमान सचिन पाययट की ताजपोशी की तैयारी कर रहा है. गहलोत खेमे के विधायकों ने विद्रोह कर दिया। गहलोत समर्थक मंत्रियों और विधायकों ने अपने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को सौंप दिए।