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राजस्थान में जीत के लिए गुर्जर आदिवासी समुदायों पर BJP की नजरें; दिग्गजों की घर वापसी पर जोर

राजस्थान के चुनावी किले को फतह करने के लिए भाजपा गुर्जर आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। इसके लिए उन दिग्गजों की घर वापसी कराई जा रही है जिनका इन समुदायों में एक मजबूत जनाधार है।

राजस्थान में जीत के लिए गुर्जर आदिवासी समुदायों पर BJP की नजरें; दिग्गजों की घर वापसी पर जोर
Krishna Singhलाइव हिंदुस्तान,जयपुरSun, 13 Aug 2023 02:33 AM
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में लगभग चार महीने बचे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक दलों ने रणनीतियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने गुर्जर और आदिवासी समुदायों तक पहुंच बनाने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। माना जाता है कि गुर्जर और आदिवासी समुदायों ने साल 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराने में मदद की थी। भाजपा द्वारा गुर्जर और आदिवासी समुदायों में पैठ बनाने की एक कोशिश की बानगी शनिवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में नजर आई। 

कुछ पूर्व विधायकों समेत 23 नेताओं ने शनिवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान प्रभारी अरुण सिंह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा। जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से देखें तो इस कार्यक्रम को बेहद खास माना जा रहा है। यह जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से अपनी चुनावी संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए पार्टी के प्रयासों का संकेत देता है।

दरअसल, शनिवार को भाजपा में लौटने वालों में एक आदिवासी नेता एवं पूर्व विधायक अनीता कटारा भी शामिल थीं। दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित सागवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व भाजपा विधायक अनीता कटारा ने चुनाव टिकट से इनकार किए जाने के बाद 2018 के चुनावों से पहले भाजपा छोड़ दी थी। अब वह एकबार फिर भाजपा में शामिल हुई हैं। 

कटारा की भाजपा में वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी 2018 में सागवाड़ा सीट भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) से हार गई थी। बीटीपी ने तब दो सीटें जीती थीं। अनीता कटारा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था लेकिन बीटीपी के उम्मीदवार से हार गई थीं। मौजूदा परिदृश्य को लेकर कहा जा रहा है कि दक्षिणी राजस्थान में आदिवासियों के एक वर्ग ने अपनी चुनावी प्राथमिकताएं खुली रखी हैं, भाजपा इसे भुनाने में जुट गई है। माना जा रहा है कि भाजपा ने आदिवासी बेल्ट में अपने प्रभाव को भुनाने के लिए कटारा की वापसी कराई है। 

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने राज्य की आदिवासी सीटों पर खराब प्रदर्शन किया। नतीजतन भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी। खासकर पूर्वी राजस्थान क्षेत्र में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। अब जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस करते हुए ही भाजपा अपनी रणनीति को धार दे रही है। उसकी घर वापसी वाली सूची में कई नेता सीकर और भरतपुर सहित पूर्वी राजस्थान के विभिन्न जिलों से हैं। 

शनिवार को घर वापसी करने वाले नेताओं में पूर्व भाजपा विधायक गोपीचंद गुर्जर भी शामिल हैं। गोपीचंद गुर्जर 1993-1998 के दौरान भरतपुर जिले के नगर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी विधायक रहे। उन्होंने राजस्थान गोवध निषेध अधिनियम, 1995 (Rajasthan Bovine Animal Act, 1995) को पारित करने के अभियान का नेतृत्व किया था। गोरक्षा के लिए अपने अभियानों के लिए जाने जाने वाले गोपीचंद की नगर के मतदाताओं में अच्छी पैठ मानी जाती है। इन मतदाताओं में गुज्जर समुदाय का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत है। मौजूदा वक्त में इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक वाजिब अली कर रहे हैं।

बता दें कि 2018 के चुनावों से पहले गोपीचंद गुर्जर तत्कालीन राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। अब भाजपा में एकबार फिर उनकी घर वापसी हुई है। भाजपा के लिए गुर्जर मतदाताओं की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार को भाजपा में शामिल होने वालों की सूची में कई गुर्जर चेहरे हैं। इनमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश किशन लाल गुर्जर, वकील अतर सिंह गुर्जर और भगवान सिंह गुर्जर शामिल हैं। 

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 के चुनावों में जब सचिन पायलट मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे थे और गुर्जर समुदाय ने कांग्रेस के पक्ष में वफादारी दिखाई थी, भाजपा का एक भी गुर्जर उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका था। पायलट जो राज्य के सबसे प्रमुख गुर्जर नेता माने जाते हैं। उनकी सीएम गहलोत से खटपट किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में जब वह अगल थलग पड़े नजर आ रहे हैं भाजपा इसे गुर्जर मतदाताओं को साधने के सुनहरे मौके के रूप में देख रही है। वैसे भी गुर्जर समुदाय को भाजपा का पारंपरिक मतदाता माना जाता है।