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31 अक्तूबर, 2020|6:52|IST

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राजस्थान: 15 याचिकाएं, हाइकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक दौड़, मकसद सिर्फ कुर्सी बचाना

gehlot mlas

राजनीति का मकसद सिर्फ एक है और वो है सत्ता, नेता चाहे कितना ही बड़ा हो अगर वे सत्ता में शामिल नहीं है तो पावर में नहीं इसलिए राजनीति में सत्ता ही सर्वोपरी है। इसके लिए चाहे संख्या बल हो या कानूनी दांवपेच कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। राजस्थान में विधायक होटलों में बंद है। दोनों खेमे अपनी अपनी चाल चल रहे है।

इस बीच कोर्ट में विधायकी बचाने और राजद्रोह के केस से खुद को बचाने के लिए एक के बाद एक 15 याचिकाएं दाखिल हो चुकी है। इनमें से 3 याचिकाओं में राज्यपाल और विधायकों के दायित्व पूरा नहीं करने की शिकायत करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जबकि 3 याचिकाएं वापस ली जा चुकी हैं। इन 15 में से तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर हुईं, बाकी 12 राजस्थान हाईकोर्ट पहुंची।

सचिन पायलट खेमे से पीआर मीना और अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने 24 जुलाई को अंतरिम फैसला सुनाया। जिसमें विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस पर यथास्थिति के आदेश दिए गए हैं। बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद मिश्रा और बीजेपी विधायक मदन दिलावर की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष और सचिव सहित अन्य से नोटिस जारी कर 11 अगस्त तक जवाब मांगा है। याचिका में बीएसपी से कांग्रेस में आए छह विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है।

मदन दिलावर हाईकोर्ट से दो याचिका याचिका वापस ले चुके हैं, इसमें एक में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी गई थी और दूसरी में विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की गुहार की गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने सचिन पायलट समेत 19 विधायकों की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट के 24 जुलाई के आदेश पर रोक लगाने के लिए एसएलपी दायर की थी। इसे 27 जुलाई को वापस ले लिया।

एक जनहित याचिका में बाड़ाबंदी में बंद विधायकों के वेतन भत्तों पर रोक लगाने की मांग की है, जबकि एक अन्य जनहित याचिका में राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा है कि राज्यपाल संवैधानिक सिद्धांतों और सुप्रीम कोर्ट के नबाम रेबिया केस फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं। इसी तरह एक अन्य जनहित याचिका में कहा है कि मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल से विधानसभा का सत्र आहूत करने का अनुरोध किया है, लेकिन उस अनुरोध को ठुकरा दिया गया।

विधायक भंवरलाल शर्मा ने एसओजी जांच पर रोक लगाने और एफआईआर को रद्द करवाने के लिए तीन याचिकाएं दायर की है। एफआईआर रद्द नहीं किए जाने की स्थिति में जांच एनआईए से करवाने की मांग की है। राजस्थान हाईकोर्ट के 24 जुलाई के अंतरिम आदेश को विधानसभा अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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  • Web Title:Rajasthan: 15 petitions race from High Court to Supreme Court motive only to save chair