DA Image
1 सितम्बर, 2020|2:33|IST

अगली स्टोरी

माता-पिता ने नहीं देखा स्कूल का मुंह, लेकिन बेटे पर पूरे शहर की जिम्मेदारी

rajasthan commissioner

राजस्थान के अलवर जिले में एक बेटे ने अपने अनपढ़ माता-पिता का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है। ऐसे में माता-पिता को अपने बेटे पर नाज है। न केवल उस माता-पिता को बल्कि आने वाली युवा पीढ़ी के लिए भी यह प्रेरणादायक बात है। अनपढ़ माता-पिता की संतान होने के बावजूद भी बेटा अपनी लगन और पढ़ाई से जिले में कमिश्नर बन गया। ये ही नहीं, उनकी बहू भी जिले में असिस्टेंट कमिश्नर है। ये हैं, अलवर नगर परिषद के कमिश्नर सोहन सिंह नरूका और सेल टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर उनकी पत्नी मीनाक्षी चौहान।

सरकारी स्कूल में पढ़, टॉपर में रहे शामिल
सोहन सिंह नरूका अलवर शहर के निकट मालाखेड़ा के पास सोहनपुर गांव के रहने वाले हैं। गांव में सोहन सिंह के पिता किसान का काम करते थे और मां गृहणी है। माता-पिता अनपढ़ हैं। सोहन सिंह को उनके पिता ने सरकारी स्कूल में ही पढ़ाया लिखाया। सोहन सिंह शुरू से ही होनहार विद्यार्थी रहे और स्कूल में टॉपर में शामिल रहे हैं। बारहवीं के बाद अलवर के राजर्षि कॉलेज में पढ़ाई की। दूसरे ही प्रयास के आरएएस की परीक्षा पास कर तहसीलदार बन गये। कुछ साल बाद में ही अब नगर परिषद अलवर में कमीशनर बनकर लौटे हैं। इसी के साथ उनकी पत्नी भी सेलटैक्स विभाग में सहायक आयुक्त बन गई और अब उनकी ड्यूटी भी अलवर में हैं। इतना सबकुछ होने के बाद आज भी दोनों बेहद साधारण सा जीवन व्यतीत करते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती शहर को निखारना
नगर परिषद में पिछले 8 सालों में कई आरएएस अधिकारी आयुक्त रह चुके हैं लेकिन, शहर को सुन्दर बनाने की चुनौती पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। अब सोहन सिंह के सामने भी यही सबसे बड़ी चुनौती है कि अलवर शहर को कैसे गंदगी, आवारा पशुओं से मुक्त कराने के अलावा सुव्यवस्थित बनाया जा सके।

आते ही शुरू किया काम
उन्होंने आते ही अलवर शहरवासियों द्वारा झेली जाने वाली इन परेशानियों पर काम करना शुरू कर दिया है। इसी के साथ जिन अधिकारी व युवाओं ने शहर के लिए अच्छे प्रयास किए है, उनसे भी सुझाव लेकर अमल में लाने की सोच के साथ आगे बढने लगे हैं। उनका मानना है कि शहरवासियों का सहयोग मिला तो अलवर की सूरत बदलकर ही दूसरी जगह जाएंगे। 

नहीं भूले अपने गांव को
सोहन सिंह को अपने गांव से भी पूरा लगाव है। वे समय निकालकर गांव जाते रहते हैं। पिता की बीमारी से मृत्यु होने के बाद मां उनके साथ अलवर में रहने लगी हैं। लेकिन, जब भी गांव जाने का अवसर आता हैं तो परिवार सहित जाते हैं। सोहन सिंह का व्यक्तित्व मिलनसार होने से उन्होंने जहां भी काम किया है वहां उनकी छवि अलग ही रही है। 

यूआईटी में रहते 1700 करोड़ की जमीन कराई मुक्त
सोहन सिंह पहले यूआईटी में अतिक्रमण निरोधक अधिकारी व भूमि अवाप्ति अधिकारी भी रह चुके हैं। उस दौरान करीब 1 हजार 700 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का बड़ा काम किया था। इसके अलावा विज्ञान नगर, अरावली विहार व शालीमार अवासीय योजनाओं में अवाप्ति की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं।

 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Parents did not see the face of the school but the responsibility of the whole city on the son