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Hindi News राजस्थानLok Sabha elections: 'सत्ता सिंहासन' का गलियारा है पूर्वी राजस्थान, क्या इस बार चलेगी मोदी लहर?

Lok Sabha elections: 'सत्ता सिंहासन' का गलियारा है पूर्वी राजस्थान, क्या इस बार चलेगी मोदी लहर?

पूर्वी राजस्थान सत्ता सिंहासन का गलियारा माना जाता है। दौसा, करौली-धौलपुर, अलवर, जयपुर शहर-जयपुर ग्रामीण, टोंक-सवाई माधोपुर अहम सीटें मानी जाती है। इस बार बीजेपी को कड़ी चुनोती मिल रही है।

Lok Sabha elections: 'सत्ता सिंहासन' का गलियारा है पूर्वी राजस्थान, क्या इस बार चलेगी मोदी लहर?
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरThu, 11 Apr 2024 09:58 AM
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पूर्वी राजस्थान सत्ता सिंहासन का गलियारा माना जाता है। दौसा, करौली-धौलपुर, अलवर, जयपुर शहर-जयपुर ग्रामीण, टोंक-सवाई माधोपुर अहम सीटें मानी जाती है। पिछले दो चुनावों में बीजेपी लगातार जीत रही है। लेकिन इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वजह यह है कि सत्ता विरोधी लहर की काट बीजेपी प्रत्याशियों के पास नहीं है। बीजेपी ने रणनीति के तहत कई सीटों पर अपने प्रत्याशी बदल दिए है। पीएम मोदी का रोड शो और जनसभाएं प्रस्तावित है, ताकि माहौल बन सके। सियासी जानकारों का कहना है कि इस बार करौली-धौलपुर जयपुर ग्रामीण, अलवर, दौसा और टोंक-सवाई माधोपुर में बीजेपी की सीट फंसी हुई है। कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है। दौसा सीट को निकालने के लिए बीजेपी कल 12 अप्रैल को पीएम मोदी का रोड शो करवाने जा रही है। 

विधानसभा चुनाव के हिसाब से कांगेस बढ़त में है। दौसा में किरोड़ी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भजनलाल सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल का गृह जिला दौसा है। ऐसे में किरोड़ी लाल गांव-गांव जाकर मोदी के रोड शो को सफल बनाने की अपील कर रहे है। दौसा में पहले यह माना जा रहा था कि किरोड़ी लाल के भाई जगमोहन को बीजेपी का टिकट मिलेगा, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया है। ऐसे में भीतरघात का खतरा भी कन्हैयालाल को हो सकता है। एसटी के लिए रिजर्व सीट दौसा में इस बार कांटे के मुकाबले में कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा भारी पड़ते हुए दिखाई दे रहे है। सचिन पायलट दौसा में उनके पक्ष में कई जनसभाएं कर चुके है। बता दें दौसा सचिन पायलट का गढ़ माना जाता है। सचिन पायलट के पिता स्वर्गीय राजेश पायलट दौसा से 5 बार सांसद रहे। इस बार बीजेपी ने सांसद जसकौर मीणा का टिकट काट दिया है। पूर्व मंत्री कन्हैयालाल को खड़ा किया है। 

करौली-धौलपुर में विधानसभा के हिसाब से कांग्रेस भारी 

दूसरी तरफ 2008 के बाद अस्तित्व में करौली- धौलपुर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला रोचक होने जा रहा है।  इस सीट के लिए भाजपा महिला और नए चेहरे पर दांव खेलते हुए इंदु देवी जाटव को प्रत्याशी बनाया तो कांग्रेस पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे भजनलाल जाटव को प्रत्याशी बनाया है। करौली - धौलपुर सीट की बात करें तो इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें बसेड़ी , बाड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, टोडाभीम, हिंडौन, करौली , सपोटरा विधानसभा सीट शामिल है।  2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 2, कांग्रेस ने 5 और बीएसपी ने 1 सीट जीती थी। ज्यादातर गैर-बीजेपी नेता भारी अंतर से जीते। विधानसभा के चुनाव के हिसाब से कांग्रेस भारी है। मोदी के दौरे से हवा बन सकता है। ऐसे में ये सीट भाजपा के बड़ी चुनौती वाली है। यही वजह है कि पीएम मोदी करौली सभा के जरिए न केवल करौली - धौलपुर लोकसभा सीट को सजा देंगे बल्कि उसके आसपास वाली पूरी राजस्थान के अंदर सीटों पर भी प्रभाव डालने की कोशिश होगी। 

सियासी जानकारों का कहना है कि इस बार टोंक-सवाई माधोपुर सीट से कांग्रेस-बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला। यहां बीजेपी के अऱबपित प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनपुरिया और कांग्रेस विधायक एवं पूर्व डीजीपी हरीश मीणा के बीच मुकाबला है। हरीश मीणा पायलट समर्थक माने जाते है। इस लिहाज से हरीश मीणा को गुर्जर वोट मिल सकते है। सियासी जानकारों का कहना है कि यहां हार-जीत का फैसला जाति ही करेगी। सुखबीर सिंह जौनपुरिया का टिकट कटते-कटते बचा है। पहले संभावना थी कि पार्टी टिकट काटेगी। सुखबीर पर वादें पूरा नहीं करने के आरोप लग रहे है। हरीश मीणा अपनी हर सभा में सुखबीर के वादों को ही जोर शोर से उछाल रहे है। जबकि सुखबीर जौनपुरिया  राम मंदिर और मोदी की योजनाओं के सहारे जीत के प्रति आश्वस्त है।