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राजस्थान में पहले चरण में जयपुर समेत इन सीटों पर कांटे का मुकाबला, कौनसे मुद्दे तय करेंगे हार जीत

राजस्थान में पहले चरण का चुनावी प्रचार आज थम जाएगा। पहले चरण में बीजेपी का और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। पहले चरण में कांग्रेस गठबंंधन 5 से 6 सीटों पर मजबूत है।

राजस्थान में पहले चरण में जयपुर समेत इन सीटों पर कांटे का मुकाबला, कौनसे मुद्दे तय करेंगे हार जीत
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरWed, 17 Apr 2024 01:59 PM
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राजस्थान में पहले चरण का चुनावी प्रचार आज थम जाएगा। पहले चरण में बीजेपी का और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। पहले चरण में गंगानगर, बीकाने र, चूरू, झुंझूनू, सीकर, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, अलवर, भरतपुर, करौली-धौलपुर, दौसा और नागौर लोकसभा क्षेत्रों में 19 अप्रैल को मतदान होगा। राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ जातीय समीकरण हार-जीत तय करेंगे। पिछले दो चुनावों में बीजेपी ने सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की है। लेकिन इस बार बीजेपी की 6-7 सीटें फंस गई है। कांग्रेस ने सीकर और नागौर सीट गठबंधन के सहयोदी दलों के लिए छोड़ दी है। सियासी जानकारों का कहना है कि सीकर में अमराराम की जीत तय मानी जा रही है। जबकि नागौर में ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनीवाल के बीच कांटे के टक्कर है। दौसा सीट पर कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा भारी पड़ते हुए दिखाई दे रहे है। झुंझुनूं और जयपुर ग्रामीण में कांग्रेस-बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है। सियासी जानकारों का कहना है कि प्रथम चरण की 12 सीटों में बीजेपी आधा दर्जन सीटों पर ही कांग्रेस के आगे दिखाई दे रहे है। जबकि पिछली बार प्रथम चरण की इन सभी 12 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था। नागौर सीट पर बीजेपी के समर्थन से हनुमान बेनीवाल ने जीत हासिल की थी। जयपुर में बीजेपी मजबूत मानी जा रही है। जबकि अलवर में दिलचस्प मुकाबला होगा। 

दौसा में कांग्रेस मजबूत, अलवर में दिलचस्प मुकाबला

दौसा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस ने दौसा से विधायक मुरारीलाल मीणा को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने बस्सी से पूर्व विधायक कन्हैया लाल मीणा को मैदान में उतारा है। दौसा सीट पर उम्मीदवार के हिसाब से मुरारीलाल मीणा को मजबूत माना जा रहा है। कन्हैया लाल मीणा अब तक बस्सी से बाहर सक्रिय नहीं रहे। गुर्जर, मीणा, दलित और मुस्लिम वोटर्स के समीकरणों की वजह से कांग्रेस का पक्ष मजबूत दिख रहा है, लेकिन भीतरघात की भी आशंका है। बीजेपी में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा फैक्टर भी अहम रहेगा। मुरारीलाल मीणा, सचिन पायलट खेमे के नेता हैं। पायलट ने भी इस सीट पर पूरी ताकत लगा रखी है। शुक्रवार को पीएम मोदी के रोड शो के बाद भाजपा की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

भरतपुर : जाट आंदोलन से बीजेपी को नुकसान का अंदेशा

प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले और लोकसभा क्षेत्र भरतपुर में पिछले दो बार से बीजेपी कब्जा जमा रही है। इस बार क्षेत्र की 8 विधानसभा सीटों में से 5 भाजपा के खाते में हैं। बयाना की निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने भाजपा को समर्थन दे रखा है। भरतपुर शहर की सीट आरएलडी के पास है, जो इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन में है। भरतपुर सीट पर जाट आरक्षण आंदोलन की हवा बह रही है। क्षेत्र में करीब 5 लाख जाट वोटर्स हैं। ओबीसी में शामिल करने को लेकर जाटों में बीजेपी के प्रति नाराजगी है। इसका असर वोट बैंक पर भी पड़ सकता है। वहीं, इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 3.50 लाख जाटव वोटर्स हैं, जो एक बड़ा वर्ग है। कांग्रेस कैंडिडेट संजना इसी समाज से हैं। वहीं, कोली समाज के करीब 70 हजार वोट हैं। मूल रूप से भुसावर की रहने वाली संजना जाटव कठूमर से महज 409 वोटों से विधानसभा चुनाव हार गई थीं। लेकिन, क्षेत्र में प्रियंका गांधी के अभियान लड़की हूं, लड़ सकती हूं में संजना ने काफी काम किया था। इससे उनकी पकड़ मजबूत हुई है।

करौली-धौलपुर : बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

करौली सीट पर एससी और एसटी वोटर काफी निर्णायक स्थिति में रहते हैं। सांसद मनोज राजोरिया का टिकट काट कर भाजपा ने इंदु देवी को प्रत्याशी बनाया है। इंदु देवी करौली की रहने वाली हैं और प्रधान रह चुकी हैं। लोगों से उनका सीधा जुड़ाव रहा है। करौली क्षेत्र में इंदु देवी को इसका फायदा मिलेगा। भजनलाल जाटव भी दो बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके हैं। लेकिन, करौली में जनता अभी उन्हें सहज स्वीकार नहीं कर पा रही, क्योंकि वे रहने वाले भरतपुर जिले के हैं। वे धौलपुर क्षेत्र की चारों विधानसभा सीटों पर मजबूत स्थिति में रह सकते हैं। जानकारों की मानें तो यहां एससी-एसटी वोटर निर्णायक स्थिति में रहते हैं। दोनों ही मजबूत प्रत्याशी हैं, लेकिन दोनों एक ही जाति से आते हैं। इसलिए जाटवों का वोट बैंक बंटेगा। एक करौली क्षेत्र में मजबूत है तो दूसरा धौलपुर में। इसलिए दोनों के बीच में कड़ी टक्कर लग रही है। हालांकि करौली-धौलपुर की 8 विधानसभा सीट में से 5 पर कांग्रेस, 1 पर बसपा और 2 पर भाजपा है। बीजेपी यहां मजबूत नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि करौली में पीएम मोदी की सभा के बाद माहौल बदल सकता है

बीकानेर : बीजेपी के जीतने के आसार

बीकानेर में इस बार भी बीजेपी ने मौजूदा कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को ही अपना प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने राजस्थान सरकार में मंत्री रहे गोविंदराम मेघवाल को उतारा है।गोविंदराम मेघवाल हाल में खाजूवाला सीट से विधानसभा चुनाव हार गए थे। अर्जुनराम मेघवाल लगातार 3 बार से सांसद बन रहे हैं।वर्तमान में यहां बीजेपी मजबूत दिख रही है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में यहां बीजेपी को लोकसभा क्षेत्र की 8 विधानसभा में से 6 सीटों पर जीत मिली थी। विधानसभा चुनावों से सबक लेते हुए कांग्रेस ने यहां अपने बागी जाट नेताओं को दुबारा से अपने साथ कर लिया है। श्रीगंगानगर :  कांटे का मुकाबला 

श्रीगंगानगर सीट पर बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदलकर चौंकाया है। भाजपा ने इस बार यहां से 4 बार के सांसद निहालचंद मेघवाल का टिकट काट अनूपगढ़ नगर परिषद की सभापति प्रियंका बैलान को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने कुलदीप इंदौरा को प्रत्याशी बनाया है। इंदौरा श्रीगंगानगर जिला प्रमुख भी हैं और राजनीतिक परिवार से आते हैं। इंदौरा अनूपगढ़ विधानसभा से 2 बार विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं। दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा था।BJP प्रत्याशी प्रियंका बैलान का ससुराल अरोड़वंश समुदाय में है। कांग्रेस उनके जनरल कैटेगरी वाले परिवार की बहू होने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। कांग्रेस का दावा है कि एससी रिजर्व सीट पर भी बीजेपी जनरल प्रत्याशी का कब्जा करवाना चाहती है।

झुंझुनूं : कांग्रेस दिखाई दे रही है मजबत 

झुंझुनूं लोकसभा भी उन सीटों में शामिल है, जहां कांग्रेस और भाजपा में अच्छी टक्कर होगी। भाजपा से शुभकरण चौधरी और कांग्रेस से विधायक बृजेंद्र ओला मैदान में हैं।शेखावाटी में ओला परिवार की राजनीतिक विरासत का प्रभाव है। बृजेंद्र के पिता शीशराम ओला इसी सीट से 1996 से 2009 तक लगातार सांसद रहे थे। ओला और चौधरी के जरिए दोनों बड़ी पार्टियों ने सामाजिक समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया है। भाजपा ने 2019 में तत्कालीन सांसद संतोष अहलावत का टिकट काट कर नरेंद्र कुमार को मौका दिया था।पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें, तो कांग्रेस ने इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल 8 में से 6 जीती थीं। ऐसे में कांग्रेस का प्रदर्शन भी बृजेंद्र ओला का उत्साह बढ़ा रहा है।

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