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जानिए कौन है विनोद जाखड़? राजस्थान NSUI के नए प्रदेश अध्यक्ष; कांग्रेस का दलित कार्ड

कांग्रेस ने राजस्थान एनएसयूआई के नए प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए है। जाखड़ अभिषेक चौधरी का स्थान लेंगे। लोकसभा चुनाव से पहले नियुक्ति अहम मानी जा रही है।

जानिए कौन है विनोद जाखड़? राजस्थान NSUI के नए प्रदेश अध्यक्ष; कांग्रेस का दलित कार्ड
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरSun, 07 Jan 2024 05:29 PM
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कांग्रेस ने राजस्थान एनएसयूआई के नए प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए है। जाखड़ अभिषेक चौधरी का स्थान लेंगे। लोकसभा चुनाव से पहले नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है।विनोद जाख़ड़ ने 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राजस्थान यूनिवर्सिटी का चुनाव जीतकर सब को चौंका दिया था। विनोद जाखड़ एससी वर्ग से आते है जयपुर के पास के ही रहने वाले है। 7 सितंबर 1994 को विनोद जाखड़ का जन्म हुआ। पिता मिस्त्री हैं और मां घर की देखभाल करती हैं। चार भाई बहनों में सबसे बड़े विनोद जब 7 साल के हुए तब इनका परिवार जयपुर शहर आ गया। विनोद के पिता को शहर के एक प्राइवेट स्कूल में प्लास्टर का काम मिला। उन्हें पिता की मजदूरी की बदौलत उसी स्कूल में फ्री में पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 2014 में राजस्थान कॉलेज में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए दावा ठोक दिया। लोगों में विनोद को लेकर एक नई उम्मीद दिखाई दी और देखते ही देखते उन्होंने चुनाव जीत लिया। इसी के साथ ही राजस्थान कॉलेज को अपना पहला दलित अध्यक्ष मिल चुका था। 

विश्वविद्यालय में एनएसयूआई ज्वाइन किया

विनोद ने राजस्थान कॉलेज के छात्रों का भरोसा तो जीता, लेकिन अभी असली चुनौती बाकी थी। राजस्थान कॉलेज के छात्रों से मिले प्यार और सम्मान से विनोद का हौसला बुलंद हो गया था। एनएसयूआई ज्वाइन कर लिया।विनोद बताते हैं, जब मैं यूनिवर्सिटी में चुनाव प्रचार कर रहा था तो मुझे रोकने के लिए एबीवीपी वालों ने मेरे खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मेरे सरनेम से लोगों को लगता है कि मैं जाट हूं। इसलिए बाकी छात्र संगठन के नेताओं को डर लगने लगा कि कहीं मैं जाटों का वोट न पा जाऊं। तो उन लोगों ने इसे रोकने के लिए मेरा जाति प्रमाण पत्र निकलवाकर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर जगह-जगह चिपका दिया, लेकिन छात्रों ने इनकी एक भी चाल कामयाब नहीं होने दी। छात्रों के मिले अपार समर्थन से ब्राह्मण, जाट और राजपूत के वर्चस्व वाले छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर पहली बार किसी दलित ने चुनाव जीत लिया। विनोद जाखड़ को मिले वोट एनएसयूआई और एबीवीपी के प्रत्याशियों को मिले कुल वोटों से 65 वोट ज्यादा थे। उनके यूनिवर्सिटी में चार सालों में जमीनीं तौर पर किये गए काम से भी उन्हें फायदा मिलाय़

फिर से थामा एनएसयूआई का दामन

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में इतिहास रचने के बाद विनोद जाखड़ ने एक बार फिर से एनएसयूआई का दामन थाम लिया है। लेकिन छात्रसंघ चुनाव से ठीक पहले टिकट नहीं दिए जाने के बाद भी अब फिर से एनएसयूआई में क्यों चले गए? इस सवाल पर विनोद कहते हैं उस समय एनएसयूआई को मेरे ऊपर भरोसा नहीं था कि मैं चुनाव जीता ले जाऊंगा, लेकिन अब चुंकि मैंने निर्दलीय होकर भी चुनाव जीत लिया है इसलिए मैं उनके भरोसे को जीतने में कामयाब हो गया हूं। हम दलित समुदाय और अन्य गरीब समुदाय के लिए लड़ना चाहते हैं। मेरे चुनाव जीतने के बाद से दलित समुदाय को यूनिवर्सिटी में एक नयी ताकत मिली। वह अपनी बात खुल कर सकते हैं। जब हमारे कलम में, जबान में और बोली में ताकत होगी, तभी हम अपनी समाजिक लड़ाई लड़ पाएंगे।

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