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राम लला की प्राण पतिष्ठा से पहले अयोध्या पहुंची स्पेशल पगड़ी, भक्तों ने बताया क्यों है खास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  शुक्रवार को शहर में व्यवस्थाओं की समीक्षा और निरीक्षण किया। इससे पहले गुरुवार को राम लला की मूर्ति को राम मंदिर के 'गर्भ गृह' में रखा गया।

राम लला की प्राण पतिष्ठा से पहले अयोध्या पहुंची स्पेशल पगड़ी, भक्तों ने बताया क्यों है खास
Aditi SharmaANI,नई दिल्लीSun, 21 Jan 2024 11:42 AM
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अयोध्या में राम लला की प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बस कुछ ही समय बाकी रह गया है. पूरा देश इस समारोह का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।  राम लला के प्रति अपनी आस्था और भक्ति व्यक्त करने के लिए देश भर से लोग इस विशाल समारोह से पहले नकद या अन्य प्रकार से योगदान दे रहे हैं। इसी तरह राजस्थान के जोधपुर से भक्त 'राम नगरी' में प्रसिद्ध 'रामनामी' पगड़ी लेकर आए हैं।  जोधपुर से लाई गई इन पगड़ियों पर 'जय श्री राम' लिखा हुआ है।

जोधपुर के आचार्य संदीपन महाराज ने कहा, "मैं अयोध्या में आकर असीम खुशी और गर्व से भर गया हूं। मुझे 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह का निमंत्रण मिला था। ऐसा लगा जैसे भगवान ने स्वयं चाहा हो कि मैं 'प्राण प्रतिष्ठा' के लिए यहां आऊं। मैंने जो पगड़ी पहनी है, वह वहां प्रसिद्ध है जहां से मैं आता हूं। मैं सभी 'राम भक्तों' के लिए इसी तरह की पगड़ी लाया हूं।"

उन्होंने कहा, ये पगड़ियां 'प्राण प्रतिष्ठा' के दिन राम भक्तों के बीच वितरित की जाएंगी। भव्य मंदिर के उद्घाटन दिवस पर हर किसी की जुबान पर भगवान राम का नाम हैं। मैं चाहता हूं कि राम लला शब्द हर किसी के दिल और दिमाग में बस जाए। इससे पहले, शनिवार को छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु छत्तीसगढ़ के चंपा जिले के शिवरीनारायण से 'मीठे बेर' लाए थे। राम जन्मभूमि ट्रस्ट को फल सौंपने के लिए 17 भक्तों का एक समूह अयोध्या पहुंचा था।

मान्यता है कि शिवरीनारायण भगवान राम का ननिहाल था। वनवास के दौरान, जब भगवान राम भाई लक्ष्मण के साथ वनवास स्थल पहुंचे, तो शबरी नाम की एक भक्त ने उन्हें अपने आधे खाए हुए 'मीठे बेर' खिलाए थे। उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  शुक्रवार को शहर में व्यवस्थाओं की समीक्षा और निरीक्षण किया। इससे पहले गुरुवार को राम लला की मूर्ति को राम मंदिर के 'गर्भ गृह' में रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'प्राण प्रतिष्ठा' के उपलक्ष्य में अनुष्ठान करेंगे, जबकि लक्ष्मीकांत दीक्षित के नेतृत्व में पुजारियों की एक टीम मुख्य अनुष्ठान का नेतृत्व करेगी।

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