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JLF 2024: मैं हार्ड कोर कांग्रेसी हूं, BJP में जाने के सवाल पर पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी 

राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज आखिरी दिन है। शुरुआती सत्र में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उन पर लिखी किताब पर चर्चा की।

JLF 2024:  मैं हार्ड कोर कांग्रेसी हूं, BJP में जाने के सवाल पर पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी 
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरMon, 05 Feb 2024 05:01 PM
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज आखिरी दिन है। शुरुआती सत्र में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उन पर लिखी किताब के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी के अंधभक्त थे। वे इंदिरा गांधी से पूछकर कपड़े पहनते थे। वहीं, अपने जीवन के आखिरी दिनों में वे कांग्रेस के हालात से परेशान थे। मैं भी हार्डकोर कांग्रेसी हूं और मौजूदा हालातों से मुझे भी परेशानी है। यह हर कांग्रेसी नेता के मन के हालात हैं। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि मेरे बीजेपी में जाने की बात कोरी अफवाह है। मैंने राजनीति से संन्यास ले लिया है। मेरा किसी भी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन मैं कांग्रेस की हार्डकोर समर्थक हूं।

मेरे पिता होते तो काफी परेशान होते

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने जयपुर लिटरेटर फेस्टिवल में बेबाक अंदाज में सवालों के जवाब दिए।  कहा- UPA के दौरान मेरे पिता ने सोनिया गांधी से कहा था कि एक कमजोर सरकार की जगह विपक्ष में होना ज्यादा बेहतर होता। मेरे पिता होते तो कांग्रेस के मौजूदा हालत से काफी परेशान होते। यह सिर्फ उनके ही नहीं, हर कांग्रेसी नेता के मन के हालात हैं। फिलहाल जो हालत है, उस से मुझे भी परेशानी है। मेरे ‌BJP में जाने की बात अफवाह है, मैं कहीं नहीं जा रही हूं। मैं हार्ड कोर कांग्रेसी हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राहुल गांधी और गांधी परिवार से बाहर भी सोचना चाहिए. राहुल गांधी की आलोचना कांग्रेस की आलोचना नहीं है. मेरी किताब में इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी से मेरे पिता के अच्छे संबंधों का जिक्र है. क्या वे सब कांग्रेस के नहीं हैं?

लोकतंत्र में संवाद बहुत जरूरी है

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कि मेरे पिता ने जब नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में जाने का फैसला किया था, तब मैं काफी नाराज हुई थी। लेकिन तब उन्होंने समझाया कि लोकतंत्र में संवाद बहुत जरूरी है। उनके हर दल में संबंध थे। उन्होंने आरएसएस के मंच का इस्तेमाल अपनी विचारधारा को बताने के लिए किया था। वहां उन्होंने नेहरू के विचारों की बात की थी। धर्मनिरपेक्षता की बात की थी। उन्होंने कहा कि प्रणब, प्रधानमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन नहीं बन पाए, वे समझते थे कि यह मुश्किल है। इसलिए जब राष्ट्रपति बनने का मौका आया, तो वे जरूर बनना चाहते थे। 


 

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