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Hindi News राजस्थानजयपुर में बच्चे को लगाया 17.50 करोड़ का इंजेक्शन, हृदयांश को मिली नई जिंदगी; जानिए कौनसी है बीमारी

जयपुर में बच्चे को लगाया 17.50 करोड़ का इंजेक्शन, हृदयांश को मिली नई जिंदगी; जानिए कौनसी है बीमारी

राजस्थान के जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में मंगलवार को 23 महीने के हृदयांश को 17.50 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगाया गया। अस्पताल में रेयर डिजीज यूनिट के इंचार्ज डॉक्टर प्रियांशु ने लगाया।

जयपुर में बच्चे को लगाया 17.50 करोड़ का इंजेक्शन, हृदयांश को मिली नई जिंदगी; जानिए कौनसी है बीमारी
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरTue, 14 May 2024 08:35 PM
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राजस्थान के जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में मंगलवार को 23 महीने के हृदयांश को 17.50 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगाया गया। अस्पताल में रेयर डिजीज यूनिट के इंचार्ज डॉक्टर प्रियांशु माथुर और उनकी टीम ने यह इंजेक्शन लगाया। बच्चे को अमेरिका से मंगवाया गया जोल गेनेस्मा इंजेक्शन। चिकित्सकों के मुताबिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉपी नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हृदयांश को नई जिंदगी मिली है।  जयपुर के जेके लोन अस्पताल दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन पहुंचाष। जिसको लेकर अस्पताल के डॉ.प्रियांशु माथुर ने दी। उल्लेखनीय है कि हृदयांश स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉपी नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। ऐसे में बीमारी का पता चलने क बाद क्राउड फंडिंग की मदद से अमेरिका से जोलगेनेस्मा इंजेक्शन मंगवाया गया है। फिलहाल, अस्पताल में हृदयांश के प्री-टेस्ट और पेपर वर्क किए जा रहे है।

चिकित्सकों के मुताबिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक जेनेटिक न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है। इसमें एक जरूरी जीन में खराबी के कारण शरीर पर्याप्त मात्रा में SMN1 प्रोटीन नहीं बना पाता है। यह प्रोटीन नर्वस सेल को हेल्दी मसल्स को बनाए रखने और उनकी कार्यक्षमता के लिए आवश्यक है। SMN1 प्रोटीन की कमी के कारण मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं, जिससे शारीरिक एक्टिविटी करने में परेशानी होती है। 

ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा 

डॉ. प्रियांशु माथुर का कहना है कि हृदयांश को इंजेक्शन लगा दिया गया है और अगले 24 घंटों तक चिकित्सकों के ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। दरअसल, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक जेनेटिक बीमारी है। इसके कारण हृदयांश का कमर से नीचे का हिस्सा बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था। समय के साथ-साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आना शुरू हो जाते हैं और इस बीमारी से जान जाने का भी खतरा बना रहता है। इस बीमारी का इलाज 24 महीने की उम्र तक ही किया जाता है। हृदयांश के पिता नरेश शर्मा राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और जब हृदयांश को परेशानी होने लगी तो परिवार ने जयपुर के अलावा दिल्ली समेत अन्य जगहों के चिकित्सकों को दिखाया। 

क्राउड फंडिग से जुटाई राशि 

इस इंजेक्शन की कीमत को चुकाने के लिए क्राउड फंडिंग से पैसा जुटाकर या फिर सरकार की मदद की आवश्यकता होती है। डॉक्टर बताते हैं कि अगर 24 महीने के अंदर इस बीमारी का इलाज नहीं कराया गया तो ये बीमारी धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती और फैफड़े भी काम करना बंद कर देंते। इस से इस की जान को खतरा भी बढ़ सकता  था।अब इस को लेकर ब्राह्मण समाज ने बच्चे के इंजेक्शन के लिए राशि जुटाने के लिए क्राउड फंडिग अभियान भी शुरू किया है। विभिन्न संगठन भी मदद के लिए आगे आए थे। तब जाकर यह राशि जुटा पाई है। 

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