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अलवर में महंत का 41 दिन का 'अग्नि तप', भीषण गर्मी में आग के बीच कर रहे तपस्या

लोगों का कहना है कि जब से बाबा सुखराम दास महाराज अग्नि तपस्या पर बैठे हैं उस दिन के बाद से ही वो लगातार मंदिर आ रहे हैं और परिक्रमा देकर मन्नत मांग रह हैं। उनका दावा है कि उनकी मन्नत पूरी हो रही है।

अलवर में महंत का 41 दिन का 'अग्नि तप', भीषण गर्मी में आग के बीच कर रहे तपस्या
Sourabh Jainलाइव हिंदुस्तान,अलवरTue, 11 Jun 2024 05:37 PM
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अलवर में भीषण गर्मी के एक महंत द्वारा सिद्धि प्राप्त करने और क्षेत्र में शांति व अमन चैन बनाए रखने के लिए अग्नि तप किया जा रहा है। महंत की इस तपस्या को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच और 47 डिग्री तापमान के बीच महंत लगातार अपनी साधना कर रहे हैं। पूरा मामला अलवर जिले के बहरोड़ के दहमी गांव का है। 

गांव में बने बजरंग बली के मंदिर में रहने वाले महंत सुखराम दास जी के द्वारा 41 दिन के इस 'अग्नि तप' का निर्णय लिया गया और भीषण गर्मी के बावजूद वे इस तपस्या को करने बैठ गए। एक तरफ जहां 47 डिग्री तापमान में लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं तो वहीं दूसरी तरफ महंत सुखराम दास इसी आग उगलते वातावरण में अपने क्षेत्र में अमन-चैन और सुख-शांति बनाए रखने के लिए अग्नि तप में लीन हैं। उनकी इस भक्ति और तपस्या से प्रभावित होकर उन्हें देखने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण आ रहे हैं। 

तेज धूप और अग्नि कुंड में चार घंटे की कड़ी तपस्या

प्रदेश में पड़ रही भयानक गर्मी के बीच तेज धूप और अग्नि कुंड के आसपास जलते कंडों के बीच सुखराम दास चार घंटे की कड़ी तपस्या कर रहे हैं। आग उगलते सूरज के बावजूद महंत सुखराम दास इसी गर्मी में अग्नि कुंड में चार घंटे की कड़ी तपस्या में लीन हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा सिद्धि प्राप्ति और क्षेत्र में सुख चैन रहे इसके लिए तप कर रहे हैं। बाबा का मंशा के बारे में जानकर ग्रामीणों को भी अच्छा लग रहा है। वो भी बाबा की भक्ति में लीन हो रहे हैं और सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में अपना पूरा समय देते हैं। सुबह उठने के बाद महंत सुखराम स्नान कर पूरे मंत्र उच्चारण के बाद तपस्या पर बैठ जाते हैं। 

ग्रामीण महंत की परिक्रमा लगाकर मांग रहे मन्नत 

ग्रामीणों ने बताया कि जब से बाबा सुखराम दास महाराज अग्नि तपस्या पर बैठे हैं उस दिन के बाद से ही वो लगातार मंदिर में आ रहे हैं और परिक्रमा देकर मन्नत मांग रह हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मन्नत के बाद उनकी पीड़ा और मन्नत पूरी हो रही है, इसलिए वे लोग बाबा को मानने लगे हैं। इस बारे में ग्रामीण एक महिला का किस्सा भी बता रहे हैं, जिसकी बोलने की क्षमता किसी वजह से चली गई थी। उसके बारे में अच्छे से अच्छे अस्पताल के डॉक्टर्स ने कह दिया था कि महिला ठीक नहीं हो सकेगी और इसका कोई इलाज नहीं है। वही महिला जब बाबा के तप की बात सुनकर गांव में आई और जब उसने तप स्थल पर परिक्रमा लगाकर बाबा को अपनी पीड़ा बताई, तो इसके बाद बाबा ने उसे झाड़ा दिया। 11 दिन बाद वह महिला अब बोलने लगी है और उसे काफी आराम भी मिला है। 
 

सुखराम दास जी ने दास संप्रदाय से ली दीक्षा शिक्षा

महंत सुखराम दास त्यागी ने बताया कि उन्होंने गुरु महाराज श्रीश्री 108 अभिराम दास जी महंत ग्वालियर से दीक्षा ली थी और 5 साल की आयु में वैराग्य जीवन प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी है वो सब गुरु महाराज का दिया हुआ है। कल तक हमारा मोल लगता था आज हम अनमोल हैं, यह सब गुरु कृपा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अग्नि हर चीज को जला सकती है, उसी तरह उसकी परिक्रमा लगाने पर वो आपके-हमारे पापों को भी जला सकती है, उन्हें क्षीण कर सकती है।