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भजनलाल सरकार ने जारी किया 'छंटनी' का आदेश, कर्मचारियों में हड़कंप; जानिए क्या है आदेश

राजस्थान के सरकारी विभागों में अब भ्रष्ट और काम नहीं करने वाले अफसर, कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जाएगा। कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। सभी विभागों से सूची मांगी गई है।

भजनलाल सरकार ने जारी किया 'छंटनी' का आदेश, कर्मचारियों में हड़कंप; जानिए क्या है आदेश
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,जयपुरFri, 24 May 2024 05:27 PM
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राजस्थान के सरकारी विभागों में अब भ्रष्ट और काम नहीं करने वाले अफसर, कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जाएगा। भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में लगातार शिकायतों और नॉन परफॉर्मर बने रहने वाले अफसर-कर्मचारियों की विभागवार लिस्ट बनाने का काम शुरू हो चुका है।  मुख्य सचिव सुधांश पंत ने हाल ही में उच्च स्तर के अधिकारियों की बैठक में निर्देश जारी किए हैं कि जो अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ नहीं कर रहे हैं। कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार  अधिकारी-कर्मचारी जो लगातार अरुचि, भ्रष्ट आचरण और प्रशासनिक कर्तव्य निभाने में असमर्थ हैं, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक विभाग को भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं।

कर्मचारियों में हड़ंकप 

राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव सुधांश पंत के एक आदेश के बाद राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। इस आदेश में ऐसे सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की स्क्रीनिंग (छंटनी) करने और हटाने की बात कही गई है जिनका काम संतोषजनक नहीं है। मुख्य सचिव का यह आदेश सरकार के सभी विभागाध्यक्षों को भेजा गया है। इस आदेश में राजस्थान सिविल सेवाएं नियम 1996 के नियम 53(1) का हवाला दिया गया है। आदेश में लिखा गया है कि ऐसे कर्मचारी और अधिकारी की स्क्रीनिक की जाए जिन्होंने 15 वर्ष की सेवा अथवा 50 वर्ष की आयु जो भी पहले हो पूर्ण कर ली है और असंतोषजनक कार्य निष्पादन के कारण जनहितार्थ आवश्यक अपयोगिता खो चुके हैं। 

अनिवार्य सेवानिवृत्ति के ये है नियम 

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 53(1) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के प्रावधान पहले से हैं। इन नियमों के अनुसार अधिकारी और कर्मचारी जिन्होंने अपने सेवा काल के 15 वर्ष पूरे कर लिए हैं व प्रशासनिक कर्तव्य निभाने में असमर्थ हैं अथवा असंतोषजनक कार्यनिष्पादन के कारण जनहितार्थ उपयोगिता खो चुके हैं, ऐसे सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर तीन महीने के नोटिस या तीन महीने के वेतन भत्तों के भुगतान के साथ उन्हें तुरंत प्रभाव से राज्य सेवा से कार्यमुक्त किया जा सकेगा।

वसुंधरा राजे के समय भी निकला था आदेश

उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे के समय भी जून 2017 को नाकारा और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट करने का आदेश जारी हुआ था। तत्कालिन मुख्य सचिव ओपी मीना ने यह आदेश जारी किए थे। हालांकि, कर्मचारी संगठनों की नाराजगी की डर से बाद में यह आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। हालांकि, कुछ कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति दी गई थी, वह भी जबरन नहीं थी। क्योंकि शारीरिक दुबर्लता की वजह से काम करने में सक्षम नहीं थे। वसुंधरा राजे के समय जब आदेश निकला था विधानसभा चुनाव का समय नजदीक था। सरकार ने कर्मचारियों की नाराजगी के डर से अपना आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिया था।