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राजस्थान में कांग्रेस को बड़ा झटका, गहलोत के करीबी ने वापस लिया नामांकन, BJP में हुए शामिल

राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। एक तरफ यहां असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कवायद जारी है तो वहीं सीएम गहलोत के करीबी माने जाने वाले रामेश्वर दाधीच ने बगावत कर दी है।

राजस्थान में कांग्रेस को बड़ा झटका, गहलोत के करीबी ने वापस लिया नामांकन, BJP में हुए शामिल
Aditi Sharmaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 10 Nov 2023 09:53 AM
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले रामेश्वर दाधीच ने ना केवल अपना नामांकन वापस ले लिया है बल्कि उन्होंने बीजेपी का दामन भी थाम लिया है। रामेश्वर दाधीच ने सूरसागर सीट से निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। वह जोधपुर के पूर्व मेयर भी हैं। ये खबर ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए पूरा जोर लगाती नजर आ रही है।

दरअसल रामेश्वर दाधीच सूरसागर विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी की ओर से टिकट ना मिलने पर उन्होंने बतौर निर्दलीय इस सीट से नामांकन दाखिल किया था। हालांकि अब इस नामांकन को वापस लेकर वह बीजेपी में शामिल हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिह शेखावत ने रामेश्ववर दाधीच को जयपुर के मीडिया सेंटर में पार्टी की सदस्यता दिलाई।

कांग्रेस को मिल सकता था फायदा

गुरुवार को बीजेपी में शामिल होने से पहले जब दाधीच ने नामांकन वापस लिया तो माना जाने लगा कि कांग्रेस की कोशिशें काम कर गई हैं क्योंकि दाधीच ने बागी होकर सूरसागर सीट से बतौर निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। लेकिन बाद में साफ हुआ कि उनसे तो कांग्रेस की तरफ से संपर्क ही नहीं किया गया। दरअसल अगर वो सूरसागर सीट से निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ते तो इससे हिंदू वोट कट जाते और सीधा फायदा कांग्रेस के उम्मीदवार शहजाद खान को मिल जाता। ऐसे में उनका नामांंकन वापस लेना बीजेपी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

गुरुवार को दाधीच ने गजेंद्र सिह शेखावत, राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रल्हाद जोशी और सांसद राजेंद्र गहलोत की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए। उन्होंने कहा, मैं पीएम मोदी की निर्णय लेने की क्षमता को देखते हुए बीजेपी शामिल हुआ हूं। मैं उनके काम से काफी प्रभावित हूं। अगर पीएम मोदी ना होते तो राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं था।

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