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Hindi News राजस्थानकैसे यूपी से भी ज्यादा भाजपा को राजस्थान ने दी टेंशन, बहुत बड़ी गिरावट

कैसे यूपी से भी ज्यादा भाजपा को राजस्थान ने दी टेंशन, बहुत बड़ी गिरावट

राजस्थान में पिछले ही साल सत्ता हासिल करने वाली पार्टी को 11 सीटें गंवानी पड़ी हैं। पार्टी को करीब 10 फीसदी वोट शेयर का नुकसान उठाना पड़ा है। राजस्थान में कांग्रेस के समर्थन में आया उछाल।

कैसे यूपी से भी ज्यादा भाजपा को राजस्थान ने दी टेंशन, बहुत बड़ी गिरावट
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,जयपुरWed, 05 Jun 2024 11:28 AM
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राजस्थान में लगातार दो बार क्लीन स्वीप करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कमल वाली फसल इस बार रेगिस्तान की गर्मी में मुरझा गई। पिछले ही साल प्रदेश की सत्ता हासिल करने वाली पार्टी को 11 सीटें गंवानी पड़ी हैं। भले ही सीटों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश में भगवा दल को हुए नुकसान की चर्चा सबसे अधिक हो रही हो, लेकिन चिंता तो राजस्थान ने भी बढ़ा दी है, जहां पार्टी को वोटशेयर में सबसे बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा है। 

2019 के लोकसभा चुनाव से तुलना करें तो भाजपा को करीब 10 फीसदी वोट शेयर के नुकसान का सामना करना पड़ा है। पिछले चुनाव में राजस्थान में भाजपा को 58.5 फीसदी वोटर्स ने चुना था तो इस बार वोटर शेयर गिरकर 49.2 फीसदी पर सिमट गया। कांग्रेस को इस बार 37.91 फीसदी वोटशेयर हासिल हुआ है। 2019 के मुकाबले देश की सबसे पुरानी पार्टी ने यहां करीब 4 फीसदी की छलांग लगाई है। 

वोट शेयर के लिहाज से देखें तो भाजपा को राजस्थान में यूपी से भी बड़ी निराशा मिली। उत्तर प्रदेश में भले ही पार्टी को सीटों के लिहाज से अधिक नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन वोट शेयर में वहां 8 फीसदी की गिरावट आई है जो राजस्थान के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है।

11 सीटों का उठाना पड़ा नुकसान
वोट शेयर में इस डुबकी की वजह से भाजपा को राजस्थान में 11 सीटें गंवानी पड़ी हैं, जिन पर लगातार 10 साल से उसका कब्जा था। कांग्रेस ने जोरदार वापसी करते हुए 8 सीटों पर कब्जा जमाया तो 3 पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की है। भाजपा इस बार 14 सीटों पर सिमट गई है। एक तरफ जहां मोदी सरकार के मंत्री रहे कैलाश चौधरी बाड़मेर में तीसरे स्थान पर रहे तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृहनगर में भी पार्टी अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं रही।

क्यों राजस्थान में भाजपा का ऐसा हाल
एक तरफ जहां खुद भाजपा राजस्थान के नतीजों से चकित है तो राजनीतिक विश्लेषक इसके मायने तलाशने में जुटे हैं। फौरी तौर पर कहा जा रहा है कि अग्निवीर योजना को जिस तरह विपक्ष ने मुद्दा बनाया उससे भाजपा को युवाओं के बीच नुकसान उठाना पड़ा। राजस्थान में बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होते हैं। इसके अलावा जिस तरह कांग्रेस ने भाजपा पर आरक्षण हटाने और संविधान बदलने की कोशिश के आरोप लगाए उसकी वजह से भी भगवा कैंप के वोट कटे। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पार्टी को जाटों की नाराजगी और आंतरिक कलह का भी सामना करना पड़ा है। देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आने वाले समय में किस तरह अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश करती है।