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PM मोदी चाहते तो दलितों से करवा सकते थे राम मंदिर का उद्घाटन, अशोक गहलोत ने साधा निशाना

उन्होंने कहा, पीएम मोदी के पास अयोध्या के राम मंदिर का उद्घाटन दलितों और आदिवासियों से कराकर छुआछूत के खिलाफ संदेश देने का मौका था।

PM मोदी चाहते तो दलितों से करवा सकते थे राम मंदिर का उद्घाटन, अशोक गहलोत ने साधा निशाना
Aditi Sharmaपीटीआई,जयपुरFri, 05 Jan 2024 06:07 PM
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर पीएम मोदी चाहते तो खुद को आगे रखने के बजाय दलित समुदाय से प्राण प्रतिष्ठा करवा सकते थे। उन्होंने कहा, पीएम मोदी के पास अयोध्या के राम मंदिर का उद्घाटन दलितों और आदिवासियों से कराकर छुआछूत के खिलाफ संदेश देने का मौका था।

प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होगा। गहलोत ने कहा, "यह दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और सभी धर्मों के लोगों द्वारा 'प्राण प्रतिष्ठा' कराकर और शंकराचार्य को सामने रखकर छुआछुत के खिलाफ एक संदेश देने का अवसर था।"

22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति वहां जाएंगी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दलित समुदाय से हैं, उन्हें बुलाया जाना चाहिए था। लालकृष्ण आडवाणी को बुलाना चाहिए था। अशोक  गहलोत ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने कोविड महामारी के दौरान थाली बजाने का आह्वान किया था, उसी तरह उन्हें यह भी आह्वान करना चाहिए था कि 22 जनवरी के बाद देश में कोई छुआछूत नहीं होगी।

उन्होंने कहा, "छुआछूत मानवता पर कलंक है। मैं (प्रधानमंत्री मोदी) उस कलंक को धो दूंगा। ऐसा करने से प्रधानमंत्री की ''आभा और सम्मान बढ़ेगा'', ''चाहे कोई उन्हें पसंद करे या ना करें''।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि लोकतंत्र खतरे में है, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी प्रमुख एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। गहलोत ने राजस्थान में मंत्रियों को विभागों के वितरण में देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व पर भी निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, जो पहली बार विधायक बने हैं, उन्हें चीजों को समझने में समय लगेगा, उन्होंने कहा कि उन्हें रिमोट कंट्रोल से चलाया जा रहा है।

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