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उदयपुर के अस्पताल से 13 महीने की बच्ची किडनैप, पूरी घटना सीसीटीवी में कैद

घटना की जानकारी तुरंत अस्पताल प्रशासन को दी गई और सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर पता चला कि एक महिला बच्ची को अपने साथ लेकर अस्पताल से चली गई। पुलिस उस महिला को तलाश रही है।

उदयपुर के अस्पताल से 13 महीने की बच्ची किडनैप, पूरी घटना सीसीटीवी में कैद
Devesh Mishraभाषा,जयपुरSat, 24 Feb 2024 07:37 PM
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राजस्थान के उदयपुर के एक सरकारी अस्पताल के परिसर से 13 महीने की एक बच्ची को कथित रूप से अगवा करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि एक अज्ञात महिला उस समय बच्ची को उठाकर ले गई जब वह अपनी मां के साथ गलियारे में सो रही थी।

पूरी घटना सीसीटीवी में कैद
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता बीती रात अपनी मां के साथ एमबी अस्पताल के बरामदे में सो रही थी तभी सुबह करीब चार बजे मां उठी तो देखा कि उसकी बेटी गायब है। घटना की जानकारी तुरंत अस्पताल प्रशासन को दी गई और सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर पता चला कि एक महिला बच्ची को अपने साथ लेकर अस्पताल से चली गई। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि जिस महिला की बच्ची का अपहरण किया गया, वह अस्पताल में तीमारदार के तौर पर आई थी। पुलिस उस महिला को तलाश रही है।

यह भी जानिए:
वहीं जयपुर के सरकारी सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में एक युवक को कथित रूप से गलत समूह (ब्लड ग्रुप) का रक्त चढ़ाने के मामले में तीन चिकित्सकों एवं एक नर्सिंग अधिकारी को विभागीय जांच में दोषी पाया गया है। चिकित्सकों को हटाकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है जबकि नर्सिंग अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। विभाग के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। मरीज की शुक्रवार को मौत हो गई।

एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ अचल शर्मा ने कहा, 'मरीज की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत का कारण स्पष्ट नहीं है क्योंकि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है। शव को अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है।'

अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) शुभ्रा सिंह की ओर से जारी एक आदेश के अनुसार सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीज सचिन शर्मा को गलत ग्रुप का रक्त चढ़ाने के प्रकरण में जांच समिति ने अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ एस के गोयल, 'इन सर्विस रेजिडेंट' डॉ. दौलतराम एवं डॉ. ऋषभ चलाना तथा नर्सिंग अधिकारी अशोक कुमार वर्मा को दोषी पाया है। चिकित्सा महाविद्यालय (जयपुर) के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक ने यह जांच समिति बनाई थी। 

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