
राजस्थान में 100 से ज्यादा गायों की मौत,बदबू से हुआ खुलासा;शव दबाने को खोदे गए खड्डे
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र में स्थित भोमपुरा गौशाला में बड़ी संख्या में गोवंश की मौत का मामला सामने आने से इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में यहां कम से कम 100 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है।
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र में स्थित भोमपुरा गौशाला में बड़ी संख्या में गोवंश की मौत का मामला सामने आने से इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में यहां कम से कम 100 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। देर शाम अंधेरा होने के कारण स्थिति का सही आकलन करना मुश्किल रहा, लेकिन बदबू फैलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन जांच में जुट गया है।
यह गौशाला समेजा कोठी थाना क्षेत्र में स्थित है और इसकी स्थापना करीब 11 वर्ष पहले जनसहयोग से की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते लगातार गोवंश की मौतें होती रहीं, लेकिन इस पर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ, ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। हालात को देखते हुए गौशाला के अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि इसके बावजूद ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। वे पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
गोवंश की मौतों का खुलासा होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। जानकारी के अनुसार, गौशाला परिसर में बड़े-बड़े खड्डे खोदकर मृत गायों को दबाया गया था। कई शव पूरी तरह सड़-गल चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौतें अचानक नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से हो रही थीं। सूत्रों का कहना है कि रोजाना औसतन 2 से 3 गायों की मौत हो रही थी और शवों को खड्डों में डालकर ऊपर से मिट्टी डाल दी जाती थी, ताकि मामला बाहर न आ सके।
सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। अनूपगढ़ से अतिरिक्त जिला कलेक्टर भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। एसडीएम सुभाष चौधरी ने बताया कि फिलहाल गौशाला की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सरपंच को सौंप दी गई है। प्रशासन की ओर से रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वास्तविक रूप से कितनी गायों की मौत हुई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
जानकारी के मुताबिक, भोमपुरा गौशाला की स्थापना वर्ष 2014 में दो ग्राम पंचायतों के लोगों ने आपसी सहयोग से सरकारी भूमि पर की थी। शुरुआती वर्षों में गौशाला का संचालन ठीक-ठाक रहा, लेकिन करीब दो साल बाद इसका प्रबंधन रायसिंहनगर निवासी पालाराम बिश्नोई को सौंप दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद धीरे-धीरे व्यवस्थाएं बिगड़ती चली गईं और अनियमितताएं बढ़ती रहीं।
ग्रामीणों और मौके पर पहुंचे लोगों के अनुसार, गौशाला में भारी गंदगी फैली हुई है। सूखे और हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और पीने के पानी की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। कड़ाके की सर्दी के बावजूद गोवंश को ठंड से बचाने के लिए कोई समुचित इंतजाम नहीं किए गए। इसी लापरवाही के चलते गोवंश कमजोर पड़ता गया और लगातार मौतें होती रहीं।
यह मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ने लगा है। श्रीकरणपुर से कांग्रेस विधायक एवं जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सिंह रूबी समेत कई कांग्रेस नेता भोमपुरा गौशाला पहुंचकर हालात का निरीक्षण करने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर भाजपा सरकार पर गोवंश संरक्षण के नाम पर केवल राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल पूरे जिले की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




