
कार के रखरखाव पर खर्च कर दिए 10 लाख, लेकिन यह नहीं बना; रिटायर्ड कर्मचारी की याचिका पर भड़का HC
राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ के खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी का बकाया भुगतान 10 साल बाद भी नहीं करने और इसका उचित कारण तक न बता पाने को लेकर अदालत ने संघ और उसके वरिष्ठ अधिकारियों पर सख्त नाराजगी जताई।
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को उसका बकाया भुगतान नहीं करने को लेकर राज्य बुनकर सहकारी संघ लिमिटेड, जयपुर के प्रबंध निदेशक को कड़ी फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने संघ के प्रबंध निदेशक महावीर प्रसाद मीणा की तरफ से दायर अतिरिक्त हलफनामे में दी गई जानकारी पर हैरानी जताई और कहा कि संघ के खाते में पर्याप्त धनराशि होने के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर बकाया वेतन का भुगतान क्यों नहीं किया गया।

साथ ही उच्च न्यायालय ने इस बात पर सबसे ज्यादा हैरानी जताई कि संघ ने बीते वित्त वर्ष में सिर्फ कार के रखरखाव पर ही 9 लाख 55 हजार रुपए खर्च कर दिए साथ ही दीपावली पर भी एक लाख 49 हजार रुपए खर्च किए गए, लेकिन कर्मचारी का बकाया भुगतान नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल की एकलपीठ ने बुधवार को कहा कि रिटायर्ड याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी की रकम दो वर्ष की देरी से, बकाया वेतन इससे भी ज्यादा समय और अवकाश की राशि का आंशिक भुगतान रिटायरमेंट के चार साल बाद भी नहीं किया गया। सिंगल जज बेंच ने कहा कि केवल सहकारी संघ को नुकसान होने का कारण बताकर किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसका बकाया वेतन देने से नहीं रोका जा सकता।
संघ के खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी का बकाया भुगतान 10 साल बाद भी नहीं करने और इसका उचित कारण तक न बता पाने को लेकर अदालत ने संघ और उसके वरिष्ठ अधिकारियों पर सख्त नाराजगी जताई और संघ के प्रबंध निदेशक को 24 सितम्बर को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर बकाया भुगतान में हुई देरी का कारण बताने का आदेश दिया।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता अजीत सिंह कटियार राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघ लिमिटेड, जयपुर से 30 सितम्बर 2015 को सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन रिटारमेंट के लगभग 10 साल बाद भी अबतक उन्हें सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभों के साथ ही उनके नकदी अवकाश और अन्य लाभ का भी भुगतान नहीं किया गया है। इतना समय बीतने के बावजूद बकाया वेतन और लाभ का भुगतान नहीं करने को लेकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।





