
आप इससे दुखी क्यों हैं? धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ याचिका पर SC, राजस्थान सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर राजस्थान सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं?
सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं?

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को राजस्थान में पिछले महीने लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के कई प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान विधानसभा द्वारा सितंबर में पारित राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 के खिलाफ याचिकाओं पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
पीठ ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं? शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाई कोर्ट में इस अधिनियम को चुनौती क्यों नहीं दी।
वकील ने दलील दी कि कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता को चुनौती देने वाली इसी तरह की याचिकाएं शीर्ष अदालत में लंबित हैं। वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका के अंतिम निपटारे तक अधिनियम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की भी मांग की है। उन्होंने अधिनियम के तहत निर्धारित दंड का हवाला दिया और कहा कि कानून के तहत कुछ अपराधों के लिए निर्धारित जुर्माना काफी ज्यादा है। दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने उन्हें चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
इस साल सितंबर में शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने कई राज्यों से उनके संबंधित धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर उनका रुख पूछा था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि जवाब दाखिल होने के बाद वह ऐसे कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की प्रार्थना पर विचार करेगी।
उस समय पीठ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक सहित कई राज्यों द्वारा लागू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रही थी।
राजस्थान के कानून में धोखे से सामूहिक धर्मांतरण कराने पर 20 साल से लेकर आजीवन कारावास और धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर सात से 14 साल की जेल की सजा का प्रावधान है। नाबालिगों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और दिव्यांगों का धोखे से धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।





