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आप इससे दुखी क्यों हैं? धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ याचिका पर SC, राजस्थान सरकार को नोटिस

आप इससे दुखी क्यों हैं? धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ याचिका पर SC, राजस्थान सरकार को नोटिस

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर राजस्थान सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं?

Mon, 3 Nov 2025 05:30 PMSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इन याचिकाओं पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं?

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सुप्रीम कोर्ट सोमवार को राजस्थान में पिछले महीने लागू हुए अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून के कई प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान विधानसभा द्वारा सितंबर में पारित राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 के खिलाफ याचिकाओं पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

पीठ ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से पूछा कि आप इस कानून से व्यथित क्यों हैं? शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाई कोर्ट में इस अधिनियम को चुनौती क्यों नहीं दी।

वकील ने दलील दी कि कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों की वैधता को चुनौती देने वाली इसी तरह की याचिकाएं शीर्ष अदालत में लंबित हैं। वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका के अंतिम निपटारे तक अधिनियम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की भी मांग की है। उन्होंने अधिनियम के तहत निर्धारित दंड का हवाला दिया और कहा कि कानून के तहत कुछ अपराधों के लिए निर्धारित जुर्माना काफी ज्यादा है। दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने उन्हें चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

इस साल सितंबर में शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने कई राज्यों से उनके संबंधित धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर उनका रुख पूछा था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि जवाब दाखिल होने के बाद वह ऐसे कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की प्रार्थना पर विचार करेगी।

उस समय पीठ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक सहित कई राज्यों द्वारा लागू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रही थी।

राजस्थान के कानून में धोखे से सामूहिक धर्मांतरण कराने पर 20 साल से लेकर आजीवन कारावास और धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर सात से 14 साल की जेल की सजा का प्रावधान है। नाबालिगों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और दिव्यांगों का धोखे से धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra
सुबोध कुमार मिश्रा लाइव हिन्दुस्तान में दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों की गतिविधियों पर लिखते हैं। 17 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सेवाएं दे रहे सुबोध ने यूं तो डीडी न्यूज से इंटर्नशिप कर मीडिया में प्रवेश किया था, लेकिन पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत दैनिक जागरण, जम्मू से बतौर ट्रेनी 2007 में की। वह कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। वह दैनिक जागरण, नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स, अमर उजाला और हिन्दुस्तान अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल का अनुभव रखने वाले सुबोध मूलरूप से बिहार के छपरा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने स्कूली शिक्षा से लेकर विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई बिहार से की है। उसके बाद दिल्ली में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता व मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। सुबोध वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के स्टेट डेस्क पर काम कर रहे हैं। वह राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि रखते हैं। और पढ़ें
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