700 करोड़ का GST चोरी मामला, जयपुर की कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत; वकील बोला- कोई सबूत नहीं
- इस मामले में विशेष आर्थिक अपराध अदालत के जज सुनील कुमार मीना की अदालत ने 27 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद इसे 28 फरवरी को पारित करते हुए उन्होंने घासी लाल चौधरी को जमानत दे दी।

राजस्थान में जयपुर की विशेष आर्थिक अपराध अदालत ने 700 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी के कथित मामले में आरोपी घासी लाल चौधरी को जमानत दे दी है। इससे 10 दिन पहले जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) जयपुर ने कहा था कि उसने जीएसटी चोरी के एक रैकेट का पर्दाफाश किया है और भीलवाड़ा, जयपुर, उदयपुर और सीकर सहित राजस्थान के 15 स्थानों पर छापेमारी के दौरान 700 करोड़ रुपए की जीएसटी धोखाधड़ी के सबूत जब्त किए हैं।
इस छापेमारी के बाद जयपुर से घासी लाल चौधरी, केसरदेव शर्मा और स्क्रैप डीलर अरुण जिंदल सहित सात लोगों को 19 फरवरी को विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान DGGI को 13 लाख टन लोहे और स्टील का सामान बिना टैक्स चुकाए सप्लाई करने के सबूत मिले, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 4 हजार करोड़ रुपए है।
इस मामले में विशेष आर्थिक अपराध अदालत के जज सुनील कुमार मीना की अदालत ने 27 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसके बाद इसे 28 फरवरी को पारित करते हुए उन्होंने घासी लाल चौधरी को जमानत दे दी।
उधर घासी लाल चौधरी के वकील सुमित गहलोत ने अपने मुवक्किल को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। वकील ने कहा, DGGI द्वारा उनके मुवक्किल के कार्यालय परिसर और आवास पर की गई तलाशी में कोई भी आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला है।
गहलोत ने आगे तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ या मुख्य आरोपियों महावीर ट्रेडिंग, रमजान सराजुद्दीन शाह, मनोज विजय, नवीन यादव और राजीव यादव से उनके संबंध का कोई सबूत नहीं है। यह DGGI का मामला नहीं है कि उनका मुवक्किल मुख्य आरोपियों की किसी भी फर्म में निदेशक, भागीदार या लाभार्थी है।
घासी लाल चौधरी के वकील ने आगे बताया कि रिमांड आवेदन में एकमात्र आरोप यह था कि मुख्य आरोपी के कार्यालय परिसर में की गई छापेमारी में सितंबर 2023 से फरवरी 2025 तक की एक एक्सेल शीट मिली थी, जिसमें घासी लाल की फर्म- निर्माण इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित कुछ कथित बिलों का विवरण दिया गया था, हालांकि, जमानत आवेदन पर आपत्तियों में, कथित एक्सेल शीट को किसी अज्ञात मुखबिर द्वारा प्रदान किया जाना बताया गया है। इसमें सरासर विरोधाभास है, और DGGI स्रोत की पुष्टि नहीं की गई है।
सुमित गहलोत ने आगे तर्क दिया कि मुख्य आरोपी से बरामद कथित एक्सेल शीट घासी लाल और अन्य आरोपियों के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं करती है। अभियोजन पक्ष का पूरा मामला मुख्य आरोपी के बयान पर आधारित है, और उसके मुवक्किल से इसकी पुष्टि करने के लिए कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। DGGI का मामला केवल धारणाओं और अनुमानों पर आधारित है, और जीएसटी अधिनियम की धारा 132 के तहत कोई अपराध नहीं बनता है, और उनका मुवक्किल यानी घासी लाल निर्दोष है।
हालांकि, DGGI जयपुर को जीएसटी चोरी नेटवर्क के राजस्थान से परे हरियाणा और पंजाब तक फैले होने का संदेह है। उसका कहना है कि कर नियमों को दरकिनार करते हुए आरोपी लोहे और इस्पात उत्पादों की आपूर्ति के लिए फर्जी कंपनियों के माध्यम से काम कर रहे थे।
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