
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 415 उम्मीदवारों पर लगाया बैन, परीक्षा में बैठने पर लगाई पाबंदी; यह है वजह
संक्षेप: राजस्थान लोक सेवा आयोग ने धोखाधड़ी करके आयोग की परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उनमें से 415 उम्मीदवारों पर आजीवन बैन लगा दिया है, जबकि 109 उम्मीदवारों को कुछ साल के लिए प्रतिबंधित किया है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राज्य में आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में 415 उम्मीदवारों पर लाइफ टाइम बैन लगा दिया है, यानी उन्हें RPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी भर्ती परीक्षाओं से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। इन उम्मीदवारों के खिलाफ यह कार्रवाई धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और अन्य गड़बड़ियों में शामिल होने के आरोप में की गई है। इनमें से कुल 157 मामले फर्जी डिग्रियों और दस्तावेजों से जुड़े हैं और इनमें भी 126 मामले तो सिर्फ फर्जी बी.एड. डिग्रियों से जुड़े हैं।

आयोग द्वारा कुल 524 संदिग्ध और अयोग्य उम्मीदवारों पर भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने से जुड़ी रोक लगाई गई है। इनमें से 415 उम्मीदवारों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि शेष 109 उम्मीदवारों को एक से पांच साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इन उम्मीदवारों पर फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र और फर्जी डिग्री समेत अन्य फर्जी दस्तावेज लगाने व धोखाधड़ी और अन्य मामलों में शामिल होने का आरोप है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रतिबंधित 524 उम्मीदवारों में से 514 राजस्थान से हैं और 10 अन्य राज्यों से हैं, जिनमें से उत्तर प्रदेश से 5, हरियाणा से 2 तथा बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश 1-1 उम्मीदवार शामिल हैं। आयोग ने जिन प्रतिभागियों को प्रतिबंधित किया है, उनमें सबसे ज्यादा 128 जालौर जिले के हैं, इसके अलावा बांसवाड़ा जिले के 81 और डूंगरपुर जिले के 40 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित किया गया है।
जिन अभ्यर्थियों पर रोक लगाई गई है, उनमें से 126 मामले नकली बी.एड. डिग्री प्रस्तुत करने से जुड़े हैं, जबकि परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने को लेकर 148 अभ्यर्थियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 68 मामले डमी अभ्यर्थियों द्वारा दूसरों के लिए परीक्षा देने के और 38 मामले मोबाइल फोन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करके परीक्षा में नकल करने के हैं।
RPSC सचिव रामनिवास मेहता ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आयोग ने उन मामलों की जांच की मांग की है, जिनमें अभ्यर्थियों ने आरक्षित कोटे का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी तलाक की डिग्री हासिल की। कुछ मामलों में उम्मीदवारों ने मिलीभगत से तलाक का आदेश प्राप्त कर लिया और तलाकशुदा कोटे की विभिन्न भर्तियों में आवेदन कर दिया।
इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग ने जांच करने के लिए जांच एजेंसियों को पत्र लिखा है और एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद उसी आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है।





