थाने से बुलाकर पुलिसवालों को धमकाया, गालियां भी दीं; राजस्थान के मंत्री पर FIR दर्ज

एएनआई, चित्तौड़गढ़
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राजस्थान के एक मंत्री पर एफआईआर दर्ज किया गया है। मंत्री पर पुलिसवालों से गाली-गलौज करने और उन्हें धमकाने का आरोप है। मंत्री के इस करतूत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं, मंत्री ने कहा कि जान बूझकर मुझे बदनाम करने की की गई कोशिश है।

थाने से बुलाकर पुलिसवालों को धमकाया, गालियां भी दीं; राजस्थान के मंत्री पर FIR दर्ज

राजस्थान के एक मंत्री पर एफआईआर दर्ज किया गया है। मंत्री पर पुलिसवालों से गाली-गलौज करने और उन्हें धमकाने का आरोप है। मंत्री के इस करतूत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं, मंत्री ने कहा कि जान बूझकर मुझे बदनाम करने की की गई कोशिश है।

ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद ऐक्शन

पुलिस ने बताया कि राजस्थान के मंत्री गौतम डक के खिलाफ चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज करने और उन्हें धमकाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। मंत्री पर बीएनएस की धारा 132, 351(2) और 351 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद डूंगला थाने के एसएचओ शैतान सिंह ने मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस क्लिप में कथित तौर पर मंत्री पुलिसकर्मियों को गालियां देते हुए सुनाई दे रहे थे।

मंत्री का आरोपों से इनकार

इस बीच, मंत्री गौतम डक ने इन आरोपों से इनकार किया और उस ऑडियो क्लिप को उन्हें बदनाम करने की जान-बूझकर की गई कोशिश बताया। मंत्री ने एक वीडियो बयान में कहा कि यह मेरी आवाज जैसी नहीं लगती। यह मुझे बदनाम करने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।

एफआईआर के अनुसार यह घटना सोमवार को हुई। एसएचओ शैतान सिंह को मंत्री डक का फोन आया और उन्होंने एसएचओ से थाने से बाहर आने को कहा। थाने से बाहर आने के बाद कथित तौर पर मंत्री ने एसएचओ से कहा कि वे कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु कुमार को भी बुलाएं।

सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे

कांस्टेबलों के पहुंचने के बाद मंत्री ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की बात सुने बिना ही सार्वजनिक रूप से उन्हें अपशब्द कहना शुरू कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज भी की। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि डक ने अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक बल प्रयोग करने का भी प्रयास किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

दरअसल, यह मामला एक दूसरे केस की चल रही जांच से जुड़ा था। इस केस में धनराज खरोल नाम के एक आरोपी को 25 मई को पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया था। शायद इसी बात को लेकर मंत्री गौतम डक नाराज थे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

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सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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