एक्सप्लेनर: मिनी स्विट्जरलैंड नहीं, जहर का मैदान! राजस्थान की इस खूबसूरत जगह का खतरनाक सच

पीटीआई, अजमेर
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देखने पर लगता है मानों उनमें बर्फ के बड़े-बड़े कतरे पड़े हों। कोई चीड़ के पेड़ नहीं, हवा में ठंडक भी नहीं; मगर नजारा एकदम गुलमर्ग या स्विटजरलैंड जैसा। अब आप सोच रहे होंगे कि राजस्थान में भला ऐसी जगह कैसे हो सकती है, अगर है भी तो इसमें समस्या क्या है? आपको बता दें कि ये एक “मार्बल डंपिंग यार्ड” है।

मिनी स्विट्जरलैंड नहीं, जहर का मैदान! राजस्थान की इस खूबसूरत जगह का खतरनाक सच

राजस्थान के अजमेर जिले में मौजूद किशनगढ़ का एक कोना इन दिनों ‘पॉपुलर रील डेस्टीनेशन’ बना हुआ है। यहां सूरज की रोशनी में चमकते सफेद मैदान दिखाई देते हैं।जहां-तहां तालाब भी दिख जाते हैं। देखने पर लगता है मानों उनमें बर्फ के बड़े-बड़े कतरे पड़े हों। कोई चीड़ के पेड़ नहीं, हवा में ठंडक भी नहीं; मगर नजारा एकदम गुलमर्ग या स्विटजरलैंड जैसा। अब आप सोच रहे होंगे कि राजस्थान में भला ऐसी जगह कैसे हो सकती है, अगर है भी तो इसमें समस्या क्या है? आपको बता दें कि ये एक “मार्बल डंपिंग यार्ड” है। इस जगह पर रोजाना तकरीबन 5000 टूरिस्ट आते हैं। वीकेंड और छुट्टियों में इनकी संख्या 20000 तक पहुंच जाती है। यहीं से समस्या पैदा होती है।

दरअसल इस चकाचौंध के पीछे कई बुराईयां धसीं हैं। चूंकि ये एक ‘डंपिंग यार्ड’ है। आसान शब्दों में कहें तो यहां कचरा फेंका जाता है। आंकड़ों में बताएं तो रोजाना करीब 22 लाख लीटर 'मार्बल स्लरी' यहां फेंकी जाती है। ‘मार्बल स्लरी’ एक गाढ़ा, कीचड़ जैसा कचरा होता है, जो संगमरमर (marble) की कटाई, घिसाई और पॉलिशिंग के दौरान निकलता है। तो आप जिस जगह पर रील बनाने जा रहे हैं, वो दरअसल एक कचरा का बड़ा सा घेरा है, जहां संगमरमर से निकला हुआ वेस्ट फेंका जाता है।

मिनी स्विटजरलैंड नहीं, टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन

इस सुंदर जगह को पर्यावरण विशेषज्ञों ने इंसानी शरीर के लिए खतरनाक बताया है। इसके साथ ही पॉलूशन हॉटस्पॉट भी करार दिया है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान की साइंटिफिक स्टडीज ने इसे एक "टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन" बताया है। यानी ऐसी जगह जो जहरीली है। इतने खतरनाक प्रभाव सामने आने के बावजूद इस डंपिंग यार्ड को बिना किसी पर्यावरणीय सेफ्टी मेनेजमेंट के चलाया जा रहा है।

खेती की जमीन खराब हो रही, फैल रहा पलूशन

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान में एनवायरनमेंटल साइंस के प्रोफेसर लक्ष्मी कांत शर्मा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, “इन कमियों की वजह से ग्राउंडवॉटर में गंभीर कंटैमिनेशन हुआ है। खेती की जमीन खराब हुई है और धूल से होने वाला प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है, जिससे लोगों की सेहत को खतरा है।”

मंदराज चाय की दुकान चलाते हैं। उन्होंने कहा, "मार्बल के डस्ट की एक सफेद परत अक्सर हमारी फसलों को ढक लेती है। आखिर में प्रोडक्शन कम होता है। चूंकि मेरे खेत डंपिंग यार्ड के बहुत पास हैं, इसलिए पिछले साल स्लरी उनमें चली गई और मेरे खेत पर एक मोटी परत बन गई, जिससे वह बुआई के लायक नहीं रहा।

पानी में घुल रहा है जहर, जमीन हो रही बंजर

मिट्टी में लेड सिलिकेट का कंसंट्रेशन और पानी में नाइट्रेट और फ़्लोराइड का कंसंट्रेशन सामान्य स्तर से कई गुना ज्यादा पाया गया। ये बहुत ज्यादा कंटैमिनेशन दिखाता है। उन्होंने बताया, “हमारी स्टडी में यह भी पाया गया कि PM2.5 का कंसंट्रेशन, PM2.5 के एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड की लिमिट से ज़्यादा है।"

आपको ध्यान दिलाना है कि वेस्ट के कण 75 माइक्रोमीटर से छोटे होते हैं, इसलिए वे दूर-दूर तक फैल सकते हैं। इन कणों की वजह से मिट्टी इनफर्टाइल हो जाती है। यानी बंजर होकर अपनी पैदावार की क्षमता खो देती है। कई लोग सिलिकोसिस से परेशान हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालात को हाथ से निकलने से रोकने के लिए सरकार को तुरंत एक्शन लेने की ज़रूरत है।

टूरिस्ट मास्क पहने नहीं दिखे

जब PTI की इस रिपोर्टर ने साइट का दौरा किया, तो उसे एक भी व्यक्ति मास्क पहने हुए नहीं मिला। कई बच्चे, जो अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ आए थे, अपनी आँखें मलते हुए दिखे। डंपिंग यार्ड में आने वालों के लिए सब कुछ है- घोड़े, जीप, सनग्लास और दूसरी फोटो प्रॉप्स के लिए कियोस्क। इन एक्टिविटीज को मैनेज करने वाले लोग अपने चेहरे तौलिए से और आँखें सनग्लास से ढकते हुए दिखे।

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धूल उड़ाते एरिया में एंजॉय करते टूरिस्ट

किनारे पर 'चौपाटी' थीम वाले कई रेस्टोरेंट हैं, जहाँ आने वाले लोग स्वादिष्ट व्यंजनों का मजा लेते हैं, भले ही हवाएँ मार्बल की धूल उड़ा रही हों। इस जगह पर बच्चों के लिए एक खास जोन भी है, जहाँ बच्चों के मजेदार दिन का आनंद लेने के लिए कई तरह के झूले और एक्टिविटीज़ मौजूद हैं। मार्बल का कचरा ले जाने वाले टैंकर हर 10 मिनट में स्लरी वेस्ट उतारने के लिए आते देखे जा सकते थे, लेकिन यह उन टूरिस्ट के लिए कोई मायने नहीं रखता था जो फिर भी यहाँ परफेक्ट सेल्फी लेने आते हैं।

अहमदाबाद के अशोक पुरी अपने परिवार के साथ डंपिंग यार्ड घूमने आए थे। उन्होंने बताया, हमने ऑनलाइन बहुत सारे वीडियो देखे, जिनमें लोग इस जगह को मिनी स्विट्जरलैंड कह रहे थे। इसलिए जब हम राजस्थान घूमने जा रहे थे, तो हमें यहां जरूर आना था। यह बहुत सुंदर और शानदार नजारे वाला है।

डंपिंग यार्ड पर क्या बोले वहां के विधायक

हालांकि, किशनगढ़ के विधायक विकास चौधरी ने कहा कि डंपिंग यार्ड का KMA अच्छी तरह से रखरखाव करता है। यह देश भर से टूरिस्ट को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा, "इंडस्ट्री अब जो मशीनरी इस्तेमाल कर रही है, उससे कम कचरा निकलता है। मार्बल एसोसिएशन डंपिंग यार्ड को मेंटेन करने का बहुत अच्छा काम कर रही है और किशनगढ़ को एक पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अगर कोई पॉल्यूशन या हेल्थ से जुड़ी कोई चिंता है, तो हम उसे दूर करने के लिए तैयार हैं।"

पहली बार लोगों की नजरों में कब आई ये जगह

आपको बताते चलें कि सालों तक इस जगह पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यह लोकेशन तब लाइमलाइट में आई जब कॉमेडियन कपिल शर्मा ने 2016 में अपनी पहली फिल्म "किस किसको प्यार करूं" के लिए यहां एक गाना शूट किया। फिर और भी कई सेलिब्रिटी आने लगे। नोरा फतेही ने अपना गाना "छोड़ देंगे" यहां शूट किया, हनी सिंह और नुसरत भरुचा "सैयां जी" म्यूजिक वीडियो के लिए आए, और टाइगर श्रॉफ और श्रद्धा कपूर ने "दस बहाने" गाना शूट किया। बागी 3.

प्री-वेडिंग और शूटिंग से हो रही तगड़ी कमाई

इस जगह ने प्री-वेडिंग फोटोग्राफरों का भी ध्यान खींचा, जो कपल्स को यहां सफेद नज़ारों और नीले तालाबों के सामने फोटो खींचने के लिए लाने लगे। KMA ने डंपिंग यार्ड को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बदलने का एक नया मॉडल बनाया, जिसमें अब एक हेलीपैड भी है। हालांकि विज़िटर्स के लिए एंट्री फ्री है, लेकिन उन्हें लगभग एक किलोमीटर दूर KMA ऑफिस से पास लेना होगा। एक डिजिटल कैमरा लेकर आने वाले विज़िटर को 500 रुपये देने होंगे, प्री-वेडिंग शूट का खर्च 5,100 रुपये प्रतिदिन और कमर्शियल शूट का खर्च 21,000 रुपये प्रतिदिन तक होता है।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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