ट्रांसजेंडर्स को नौकरी और दाखिले में मिलेगा 3 फीसदी का वेटेज; राजस्थान HC का बड़ा फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडरों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 3 फीसदी का अतिरिक्त अंकों का वेटेज देने का आदेश दिया है। अदालत का मानना था कि ट्रांसजेंडरों को केवल ओबीसी श्रेणी में रखना काफी नहीं है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडरों के अधिकारों पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ट्रांसजेंडरों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 3 फीसदी अतिरिक्त अंकों का वेटेज देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि ट्रांसजेंडरों को केवल ओबीसी श्रेणी में रखना काफी नहीं है। इससे उनको कोई सार्थक लाभ नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को एक हाई लेवल कमेटी बनाने का निर्देश दिया जो इनके सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का अध्ययन कर आरक्षण का सही ढांचा सुझाएगी। अदालत ने साफ किया कि जब तक नई नीति नहीं बनती यह अंतरिम राहत लागू रहेगी।
ओबीसी में शामिल करने से सार्थक लाभ नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने गंगा कुमारी द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए उक्त आदेश पारित किया। गंगा कुमारी ने राज्य सरकार की 12 जनवरी, 2023 की अधिसूचना को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने स्वीकार किया कि इन ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की राज्य की नीति से कोई सार्थक लाभ नहीं मिलता।
नौकरी और दाखिले में 3 प्रतिशत का वेटेज देने के निर्देश
इसके साथ ही अदालत ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए नौकरी और शिक्षण संस्थानों के दाखिले में 3 प्रतिशत अतिरिक्त अंकों का वेटेज देने का निर्देश दिया। अदालत ने सोमवार को अपने आदेश में राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह विभिन्न श्रेणियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों की सामाजिक आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने और इनके लिए उपयुक्त आरक्षण ढांचा सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करे।
सरकारी नौकरियों के साथ शिक्षा में सीधा आरक्षण देने की मांग
अदालत ने राज्य सरकार को समिति की ओर से सामने आए निष्कर्षों के आधार पर नीतिगत निर्णय लेने के लिए भी कहा है। याचिका में गंगा कुमारी ने 2023 की अधिसूचना को रद्द करने और सरकारी नौकरियों के साथ शिक्षा में सीधा आरक्षण देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता गंगा कुमारी ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया था जिसमें ट्रांसजेंडरों को आरक्षण का हकदार एक अलग वर्ग माना गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से क्या दी गई दलील?
गंगा कुमारी ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि ओबीसी सूची में शामिल करने से प्रभावी लाभ नहीं मिल रहा है। इस वजह से अलग से कोटा दिया जाना चाहिए। उनके वकील ने दलील दी कि SC/ST या अन्य पिछड़े वर्गों से आने वाले ट्रांसजेंडर लोगों को एक मुश्किल चुनाव करना पड़ता है कि या तो वे अपना जाति-आधारित आरक्षण बनाए रखें या फिर ट्रांसजेंडर श्रेणी को चुनें। इसके लिए उनको कोई अतिरिक्त लाभ भी नहीं मिलता है। यही नहीं जब से यह नीति लागू हुई है तब से किसी भी ट्रांसजेंडर आवेदन को इसका कोई लाभ नहीं मिला है।
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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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