जमीन बेचने के लिए लेनी होगी सरकार की मंजूरी, राजस्थान में पास हुआ 'डिस्टर्ब्ड एरिया बिल'; कहां होगा लागू
राजस्थान विधानसभा में एक बिल पास किया गया है, जिसमें यह प्रावधान किय गया है कि जबरन पलायन वाले इलाकों में जमीन खरीदने के लिए सरकार से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

राजस्थान विधानसभा का बुधवार का सत्र काफी हंगामे भरा रहा। करीब पांच घंटे चली बहस के बाद ‘राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ को ध्वनि मत से पास कर दिया गया। इसे आम तौर पर डिस्टर्ब्ड एरिया बिल कहा जा रहा है। इस कानून के लागू होने के साथ ही राजस्थान, गुजरात के बाद ऐसा कानून लाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
क्या है बिल का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद उन इलाकों में मजबूरी में प्रॉपर्टी बेचने (डिस्ट्रेस सेल) और जबरन पलायन को रोकना है, जहां साम्प्रदायिक तनाव या जनसंख्या संतुलन बिगड़ने की आशंका होती है।
कलेक्टर घोषित कर सकेगा ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’
बिल के मुताबिक संबंधित जिला कलेक्टर किसी इलाके को अधिकतम तीन साल के लिए ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित कर सकता है। इसके लिए दंगे, जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की कोशिश या कानून-व्यवस्था को खतरे जैसी परिस्थितियों को आधार माना जाएगा।
संपत्ति खरीद-फरोख्त पर लगेगी रोक
अगर कोई इलाका डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित होता है तो वहां अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त या किरायेदार को निकालने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी होगी। बिना अनुमति के किया गया ट्रांसफर अवैध माना जा सकता है।
उल्लंघन पर 3 से 5 साल तक की जेल
बिल में प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति जबरदस्ती संपत्ति बिकवाता है या किरायेदार को निकालता है, तो उसे कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल तक की सजा हो सकती है।
सरकार ने बताया सामाजिक स्थिरता का कदम
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कई बार साम्प्रदायिक तनाव के कारण लोग मजबूरी में अपनी संपत्ति बेच देते हैं या घर छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। यह कानून ऐसी मजबूर बिक्री और पलायन को रोकने के लिए लाया गया है। गृह मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने भी कहा कि कई जगहों पर घरों और मंदिरों पर ताले लगे हैं, क्योंकि लोग डर या दबाव में अपने पैतृक स्थान छोड़ चुके हैं। यह कानून उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।
कांग्रेस ने किया जोरदार विरोध
वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे बीजेपी के गुजरात मॉडल की कॉपी-पेस्ट बताया। उन्होंने कहा कि किसी इलाके को ‘डिस्टर्ब्ड’ घोषित करने से मोहल्लों की छवि खराब होगी, सामाजिक रिश्तों पर असर पड़ेगा और साम्प्रदायिक विभाजन बढ़ेगा। डोटासरा ने यह भी कहा कि राज्य में पहले से रेंट कंट्रोल एक्ट मौजूद है, ऐसे में इस नए कानून की जरूरत नहीं है। विधानसभा की बहस के दौरान कांग्रेस के एक विधायक ने बीजेपी को भारतीय दंगा पार्टी तक कह दिया।
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