राजस्थान में बहू की शिकायत लेकर कोर्ट पहुंची सास, अदालत ने कहा दर्ज करो जबरन वसूली के मामले में FIR
जानकारों का कहना है कि यह मामला अपने आप में दुर्लभ है, क्योंकि व्यावसायिक और संपत्ति विवादों के मामलों में जबरन वसूली और धोखाधड़ी के मामले बेहद आम हैं, लेकिन वैवाहिक मामलों में सास की तरफ से बहू पर आरोप लगाने का यह मामला इसे असाधारण रूप से दुर्लभ बनाता है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें यहां की एक अदालत ने एक वैवाहिक मामले में अपने ससुराल पक्ष से जबरन वसूली करने के मामले में बहू के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने आरोपी बहू के खिलाफ पर्याप्त वीडियो और अन्य सबूत मिलने के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 384 (जबरन वसूली) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत संज्ञान लिया और FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अदालत ने यह आदेश आरुषि जैन नाम की महिला के खिलाफ दिया है। इस बारे में उसकी सास और पीड़िता रेणु चौरड़िया ने एक विरोध याचिका दायर करते हुए इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की थी। जिसके बाद 17 अक्टूबर, 2025 को निम्बाहेड़ा की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने इस मामले में एक आदेश जारी किया। इस मामले में पुलिस ने पहले एक अंतिम रिपोर्ट दायर करते हुए सास की शिकायत को बहू द्वारा दर्ज दहेज मामले की प्रतिक्रिया बताया था, लेकिन अदालत ने जब गवाहों के बयान और दस्तावेजी सबूतों की समीक्षा की तो मामले की सच्चाई को अलग पाया और पुलिस की रिपोर्ट से असहमति जताते हुए पुलिस से बहू के खिलाफ एक्शन लेने को कहा।
इस मामले को लेकर पीड़ित सास रेणु चौरड़िया द्वारा दायर की गई शिकायत में पीड़िता की तरफ से आरोप लगाया गया कि उनकी बहू आरुषि जैन ने अपने माता-पिता डॉ. अनिल जैन और श्रीमती अल्पना जैन के साथ मिलकर पारिवारिक संपत्ति व गहनों के लिए उन्हें परेशान किया, धमकाया और जबरन वसूली की। इस दौरान आरुषि ने अपनी बुजुर्ग और कैंसर रोगी सास को धमकाते हुए और उन पर दबाव डालते हुए उनके पैतृक गहने और उनका स्त्रीधन छीन लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाहों और वीडियो साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार के गहने दबाव में लिए गए थे। जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने आरुषि जैन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 384 और 406 के तहत संज्ञान लिया और उसे मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।
जानकारों का कहना है कि यह मामला अपने आप में दुर्लभ है, क्योंकि व्यावसायिक और संपत्ति विवादों के मामलों में जबरन वसूली और धोखाधड़ी के मामले बेहद आम हैं, लेकिन वैवाहिक और पारिवारिक मामलों में आमतौर पर पति या ससुराल वालों को ही आरोपी बनाया जाता है, ऐसे में सास की तरफ से बहू के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाने का यह मामला इसे असाधारण रूप से दुर्लभ बनाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का साथ ही यह भी कहना है कि अदालत का आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि पर्याप्त सबूत पेश किए जाने पर आपराधिक कानून सभी लिंगों पर समान रूप से लागू होता है, साथ ही उन्होंने इसे सामान्य वैवाहिक मुकदमों से उलट बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि कानून को सभी पीड़ितों की रक्षा करनी चाहिए, चाहे उनका लिंग या रिश्ता कुछ भी हो। इस केस में शिकायतकर्ता पीड़िता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता अपूर्वा चौरड़िया ने किया।
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