राजस्थान का 'पीला सोना', जिसका पाकिस्तान से है खास कनेक्शन; जानिए दिलचस्प बातें

Dec 15, 2025 02:50 pm ISTRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, बाड़मेर
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राजस्थान की पहचान आमतौर पर रेत, किलों और शाही विरासत से होती है, लेकिन इसी रेगिस्तानी धरती के नीचे छिपा है एक ऐसा खनिज, जिसे राजस्थान का पीला सोना भी कहा जाता है। जानिए इसके पाकिस्तान से क्या कनेक्शन हैं?

राजस्थान का 'पीला सोना', जिसका पाकिस्तान से है खास कनेक्शन; जानिए दिलचस्प बातें

राजस्थान की पहचान आमतौर पर रेत, किलों और शाही विरासत से होती है, लेकिन इसी रेगिस्तानी धरती के नीचे छिपा है एक ऐसा खनिज, जिसे “राजस्थान का पीला सोना” भी कहा जाता है। यह है- ‘मुल्तानी मिट्टी’। खास बात यह है कि इस मिट्टी का नाम और ऐतिहासिक पहचान पाकिस्तान के ‘मुल्तान’ शहर से जुड़ी हुई है, जो कभी भारत का ही हिस्सा था, लेकिन बटवारे के बाद पड़ोसी मुल्क के हिस्से में चला गया था।

मुल्तानी मिट्टी: नाम में छिपा इतिहास

मुल्तानी मिट्टी का नाम मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) से आया है। इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन काल में मुल्तान क्षेत्र से इस विशेष मिट्टी का व्यापार होता था। आयुर्वेदिक ग्रंथों और पुराने सौंदर्य उपचारों में भी “मुल्तान की मिट्टी” का उल्लेख मिलता है। 1947 के विभाजन के बाद मुल्तान पाकिस्तान में चला गया, लेकिन मुल्तानी मिट्टी का उत्पादन और व्यापार भारत, खासकर राजस्थान में तेजी से फैल गया।

राजस्थान बना मुल्तानी मिट्टी का गढ़

आज भारत में मिलने वाली उच्च गुणवत्ता की मुल्तानी मिट्टी का बड़ा हिस्सा राजस्थान के नागौर, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्रों से आता है। यहां की शुष्क जलवायु और खास मिट्टी संरचना इसे बेहतरीन बनाती है। इसलिए राजस्थान की मुल्तानी मिट्टी को उच्च गुणवत्ता की माना जाता है, क्योंकि इसमें मैग्नीशियम, सिलिका और कैल्शियम की मात्रा संतुलित होती है।

अन्य हिस्सों में भी पाई जाती है खास मिट्टी

ऐसा नहीं है कि भारत में मुल्तानी मिट्टी केवल राजस्थान में ही मिलती है। इसके अलावा भी कुछ जगहें मशहूर हैं, जहां ये पाई जाती है। इन हिस्सों में हैं- गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र, मध्य प्रदेश के मुरैना और शिवपुरी, आंध्र प्रदेश का अनंतपुर और तमिलनाडु में भी कुछ हिस्सों में सीमित भंडार मिलते हैं।

देश-दुनिया में क्यों है इसकी मांग?

इंटरनेशनल मार्केट में इसे “Multani Clay” या “Fuller’s Earth” कहा जाता है। कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसकी खासा मांग है, इसके चलते देश-दुनिया में इसकी हमेशा मांग बनी रहती है। मुल्तानी मिट्टी सिर्फ फेस पैक तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स, आयुर्वेदिक दवाओं, कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, ऑयल रिफाइनिंग, केमिकल और फार्मा इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि इसकी मांग भारत से लेकर यूरोप, खाड़ी देशों और अमेरिका तक है।

मुल्तानी मिट्टी को पीला सोना क्यों कहते हैं?

मुल्तानी मिट्टी का प्राकृतिक रंग हल्का पीला से मटमैला होता है। रेगिस्तानी इलाके में दूर से देखने पर पीली परतें दिखती हैं। इसे ‘पीली मिट्टी’ कहते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए ‘पीला सोना’ भी कहा जाने लगा। चूंकि मुल्तानी मिट्टी एक खनिज संपदा है। इसका खनन आसानी से हो जाता है। स्थानीय मजदूर और लोग इसे सस्ती कीमत पर निकालकर बाजार में बेंचते हैं। विदेशों तक इसे निर्यात किया जाता है।

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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