क्या कोटा में घटिया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से हुई पांच महिलाओं की मौत? विशेषज्ञों की राय
राजस्थान के कोटा में प्रसूताओं की मौत के मामलों की जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की एक खेप घटिया क्वालिटी पाई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि महिलाओं की मौत के पीछे कहीं घटिया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तो नहीं…

कोटा के दो सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान 5 महिलाओं की मौत के मामले में विशेषज्ञों ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को मुख्य कारण मानने से इनकार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। कोटा सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जांच में पाया गया कि जान गंवाने वाली अधिकतर महिलाओं में सेप्सिस और 'मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम' (एमओडीएस) जैसी गंभीर जटिलताएं थीं।
यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का संबंध मौतों से हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे दावों का समर्थन न तो चिकित्सा प्रमाणों से होता है और न ही विशेषज्ञों की राय से।
अधिकारियों ने कहा कि चिकित्सा रिकॉर्ड और विशेषज्ञ समीक्षाओं में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और मौतों के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस बात का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि अप्रभावी दवा के कारण अनियंत्रित रक्तस्राव हुआ या मौतें हुईं।
अधिकारियों ने बताया कि मामलों में उपयोग की गई दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों के कुल 37 नमूने राज्य और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए। अधिकांश नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए। हालांकि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की एक खेप 'मानक गुणवत्ता'' की नहीं पाई गई क्योंकि उसमें वह जरूरी तत्व मौजूद नहीं था जो उसमें होना चाहिए।
राज्य सरकार और औषधि नियंत्रण विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है और प्रभावित खेप की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। निर्माता, आपूर्तिकर्ता और वितरण श्रृंखला की जांच की जा रही है तथा औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
कोटा के सहायक औषधि नियंत्रक, देवेंद्र गर्ग ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि इस महीने की शुरुआत में दो सरकारी अस्पतालों में हुई मौतों और संक्रमणों के बाद एकत्र किए गए ऑक्सीटोसिन (टोसिन) के नमूने परीक्षण में विफल रहे। जांच में पाया गया कि दवा में कोई भी सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे सिजेरियन प्रसव के बाद संक्रमण और मृत्यु होने की संभावना नहीं है।इस महीने की शुरुआत में कम से कम नौ महिलाओं में सीजेरियन प्रसव के बाद संक्रमण हुआ था, जिनमें से पांच की मौत हो गई थी।
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