कोटा सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी के 48 घंटे बाद दूसरी मौत, 4 महिलाओं को जयपुर भेजने की तैयारी

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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कोटा के न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार सुबह अस्पताल में भर्ती एक और महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान ज्योति (20) के रूप में हुई है।

कोटा सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी के 48 घंटे बाद दूसरी मौत, 4 महिलाओं को जयपुर भेजने की तैयारी

कोटा के न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार सुबह अस्पताल में भर्ती एक और महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान ज्योति (20) के रूप में हुई है। इससे पहले 5 मई को पायल (28) नाम की महिला की भी मौत हो चुकी है। लगातार दूसरी मौत के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वेंटिलेटर पर लेने के बाद डॉक्टरों ने की मौत की पुष्टि

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे ज्योति की हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों द्वारा डेथ कंफर्म किए जाने के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया।

शव लेने से परिजनों का इनकार, अस्पताल के बाहर धरना

महिला की मौत के बाद परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। न्यू मेडिकल हॉस्पिटल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) के बाहर परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है।

सीजेरियन ऑपरेशन के बाद 6 महिलाओं की बिगड़ी थी तबीयत

दरअसल, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल के गायनिक वार्ड में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद 6 महिलाओं की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। बताया जा रहा है कि इन महिलाओं की किडनी प्रभावित हुई और हालत लगातार खराब होती चली गई। इनमें पायल और ज्योति की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी महिलाओं का इलाज जारी है।

टेक्निकल जांच में जुटी प्रशासन की टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार सुबह कलेक्टर पीयूष समारिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए टेक्निकल टीम गठित की गई है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि महिलाओं को दी गई दवाइयां क्लिनिकली सही थीं या नहीं। दवाओं और इलाज की पूरी प्रक्रिया का एनालिसिस किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

परिवारों में मातम, नवजात को दादी संभाल रही

5 मई को मृत हुई पायल के घर में मातम पसरा हुआ है। पायल के नवजात बेटे की देखभाल अब उसकी दादी कर रही है। परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनकी बहू की जान गई। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज मिलता तो दोनों महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी।

तीन महिलाओं को जयपुर रेफर करने की तैयारी

अस्पताल में भर्ती धन्नी, सुशीला और रागिनी समेत अन्य महिलाओं की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों ने इन्हें बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर करने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि कुछ परिजन महिलाओं को जयपुर ले जाने के लिए फिलहाल तैयार नहीं हैं। प्रशासन लगातार परिजनों से समझाइश कर रहा है।

इनपुट - योगेंद्र महावर,कोटा

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लेखक के बारे में

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सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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