मंदिर की दौलत पर खूनी खेल का खुलासा! महंत को 26 बार चाकुओं से गोदा, 10वीं सदी पुराने मठ की 345 बीघा जमीन की लड़ाई?

लाइव हिन्दुस्तान, कोटा
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राजस्थान के कोटा में 35 साल के देवानंद महाराज पर उनके आवास के बाहर 26 बार चाकुओं से हमला किया गया था। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

Kota mahant Devanand Maharaj

राजस्थान के कोटा स्थित चंद्रेसल मठ के मुख्य पुजारी देवानंद महाराज की 5 जून को हुई सनसनीखेज हत्या के पीछे अब चौंकाने वाली साजिश सामने आई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड की जड़ में करीब 10वीं सदी पुराने मठ, उसकी करोड़ों की संपत्ति और 345 बीघा जमीन पर कब्जे की लड़ाई हो सकती है।

पुलिस के मुताबिक, 35 साल के देवानंद महाराज पर उनके आवास के बाहर 26 बार चाकुओं से हमला किया गया था। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मठ के एक अन्य पुजारी नंदन बान और कोटा के वकील संतोष कुमार राय भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि हत्या को अंजाम देने के लिए चार लोगों को एक लाख रुपये की सुपारी दी गई थी, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था।

मठ की सत्ता और जमीन बनी खूनी विवाद की वजह

जांच अधिकारियों और मठ ट्रस्ट के सदस्यों के मुताबिक, देवानंद महाराज और वकील संतोष राय के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। राय मठ ट्रस्ट की ओर से अदालत में चल रहे जमीन विवाद का केस देख रहे थे। इसी दौरान ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर दोनों के बीच टकराव बढ़ता गया।

बताया जा रहा है कि देवानंद महाराज मठ के फैसलों में अपना प्रभाव बढ़ा रहे थे, जबकि दूसरी ओर संतोष राय ट्रस्ट में अपने समर्थकों को शामिल कर मठ की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करना चाहते थे।

हत्या से पहले मिल चुकी थीं जान से मारने की धमकियां

देवानंद महाराज के परिवार का कहना है कि हत्या से करीब पांच महीने पहले उन्हें मठ छोड़ने और जान से मारने की धमकियां मिली थीं। उनके भाई बुधराज गुर्जर का दावा है कि धमकी से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी गई है।

घर-परिवार छोड़कर बने थे संन्यासी

देवानंद महाराज का असली नाम देव शंकर पोसवाल था। वह राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रहने वाले थे। साल 2006 में उनकी शादी हुई थी, लेकिन 2018 में उन्होंने गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास ले लिया और देवानंद महाराज बन गए।

हालांकि, उनके संन्यास लेने के बाद भी विवाद शुरू हो गया था। वजह यह थी कि वह पहले जूना अखाड़े से जुड़े थे, जबकि चंद्रेसल मठ बान पंथ की परंपरा का पालन करता है। दोनों परंपराओं के बीच मतभेद को लेकर भी कई लोगों ने उनके महंत बनने का विरोध किया था।

जातीय राजनीति के भी लगे आरोप

मठ ट्रस्ट के कुछ सदस्यों का आरोप था कि देवानंद महाराज अपने गुर्जर समाज के लोगों को ज्यादा महत्व दे रहे थे। कुछ ट्रस्ट सदस्यों का कहना है कि गुर्जर समुदाय चाहता था कि देवानंद मठ की कमान संभालें ताकि जमीन पर उनका प्रभाव बना रहे।

345 बीघा जमीन पर वर्षों से चल रहा विवाद

पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह 345 बीघा (करीब 215 एकड़) जमीन बताई जा रही है।

जांच के मुताबिक, करीब 50 साल पहले तत्कालीन महंत श्रवण बान ने मठ की करीब 500 बीघा जमीन बेच दी थी, जो बाद में निजी लोगों के कब्जे में चली गई। इसके बाद ग्रामीणों ने अदालत में मामला दायर किया।

साल 2016 में अदालत ने फैसला दिया कि यह जमीन मठ की संपत्ति है। हालांकि, अंतिम फैसला आने तक अदालत ने जमीन की देखरेख के लिए रिसीवर नियुक्त किया। इनमें से 270 बीघा कृषि भूमि हर साल नीलाम होती है और उसकी आय बैंक खाते में जमा की जाती है। बताया जा रहा है कि इस खाते में अब तक करीब 4 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। यही रकम भी विवाद का बड़ा कारण बनी हुई है।

हत्या से पांच दिन बाद होनी थी अहम सुनवाई

राजस्थान देवस्थान विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, देवानंद महाराज ने ट्रस्ट में नए सदस्यों के नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था। इस पर 10 जून को सुनवाई होनी थी, लेकिन उससे पांच दिन पहले यानी 5 जून को उनकी हत्या कर दी गई।

पहले भी हो चुके हैं हमले

मठ के सदस्यों का कहना है कि चंद्रेसल मठ में पहले भी कई बार हिंसक घटनाएं हुई हैं। पूर्व महंत श्रवण बान पर लाठियों से हमला किया गया था, जबकि उनके उत्तराधिकारी किशोर बान पर भी दो बार हमला हुआ था। लेकिन मठ के इतिहास में पहली बार किसी महंत की हत्या हुई है।

गार्ड और सबूत मिटाने के आरोप में भी गिरफ्तारी

पुलिस ने हत्या में शामिल चार कथित हमलावरों के अलावा एक सुरक्षा गार्ड को भी गिरफ्तार किया है। वहीं एक आरोपी आदित्य वर्मा की पत्नी मिकल जॉर्ज को भी सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यही संकेत मिले हैं कि यह हत्या सिर्फ निजी रंजिश नहीं, बल्कि मठ की सत्ता, करोड़ों की संपत्ति और जमीन पर कब्जे की लड़ाई का नतीजा हो सकती है।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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