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जोधपुर एम्स में एक नाम ने कर दिया सब गड़बड़!, गलत मरीज को चढ़ा दिया खून,10 दिन बाद मौत

जोधपुर एम्स में एक नाम ने कर दिया सब गड़बड़!, गलत मरीज को चढ़ा दिया खून,10 दिन बाद मौत

संक्षेप:

जोधपुर एम्स में घटी एक ऐसी घटना जिसने पूरे चिकित्सा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां नाम की गफलत में एक मरीज को गलत खून चढ़ा दिया गया — और दस दिन बाद उसकी मौत हो गई।

Tue, 21 Oct 2025 12:39 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जोधपुर
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जोधपुर एम्स में घटी एक ऐसी घटना जिसने पूरे चिकित्सा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां नाम की गफलत में एक मरीज को गलत खून चढ़ा दिया गया — और दस दिन बाद उसकी मौत हो गई। अस्पताल की गलती ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं, और अब पूरा मामला रहस्य और सस्पेंस से भरा हुआ है।

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6 अक्टूबर की सुबह जोधपुर एम्स के जनरल वार्ड में दो मरीज भर्ती हुए — दोनों का नाम था मांगीलाल। एक, 80 वर्षीय बुजुर्ग मांगीलाल पांचौड़ी (नागौर) के रहने वाले, जो एनीमिया से पीड़ित थे। दूसरे, 50 वर्षीय मांगीलाल बिश्नोई, बालोतरा जिले के डोली गांव के निवासी, जिन्हें मधुमक्खी के डंक से एलर्जिक रिएक्शन के बाद भर्ती कराया गया था।

दोनों एक ही वार्ड में थे, नाम एक जैसा था, और यही बनी उस मौत की वजह।

10 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल के स्टाफ ने बिश्नोई परिवार को बताया कि मरीज को खून की जरूरत है। गुमानाराम, जो मरीज का भतीजा है, ने गांव से रिश्तेदारों को बुलाकर एक यूनिट खून दान कराया।

स्टाफ ने खून की बोतल लगाई और मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू कर दिया। सब कुछ सामान्य लग रहा था — लेकिन तभी अस्पताल के एक डॉक्टर ने राउंड के दौरान सवाल किया,

“इस मरीज को खून क्यों चढ़ाया जा रहा है?”

जब जांच हुई तो पता चला कि यह खून मांगीलाल बिश्नोई को नहीं, बल्कि एनीमिया पीड़ित 80 वर्षीय मांगीलाल को चढ़ाया जाना था।

तब तक तीन चौथाई खून चढ़ाया जा चुका था।

जैसे ही गलती का अहसास हुआ, नर्सिंग स्टाफ ने जल्दबाजी में ड्रिप हटाई और खून की थैली को डस्टबिन में फेंक दिया। उस वक्त किसी ने रिपोर्ट नहीं बनाई, न ही परिवार को लिखित जानकारी दी गई।

अस्पताल प्रशासन ने मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन परिजनों को शक हो गया कि कुछ बड़ा गड़बड़ हुआ है।

“जब डॉक्टर ने कहा कि खून गलत मरीज को चढ़ गया, तो पूरे वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। किसी ने भी हमें कुछ साफ नहीं बताया। बस कहा गया कि सब ठीक है, दोनों का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है।”

प्रशासन ने पहले यह कहकर मामला शांत करने की कोशिश की कि ब्लड ग्रुप एक जैसा है, इसलिए कोई खतरा नहीं। लेकिन अगले ही दिन मरीज की हालत बिगड़ने लगी।

परिजनों ने प्राइवेट लैब में जांच करवाई — रिपोर्ट में आया कि खून में इन्फेक्शन था।

एम्स प्रशासन ने मरीज को इमरजेंसी से हटाकर प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया। डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे रहे, लेकिन 10 दिन की जद्दोजहद के बाद सोमवार को मांगीलाल बिश्नोई की मौत हो गई।

मौत की खबर मिलते ही बासनी थाना पुलिस एम्स पहुंची। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।

परिजन दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

गांव में मातम पसरा है हर कोई यही पूछ रहा है,

“क्या अब इंसान की जान भी एक नाम की गलती पर चली जाएगी?”

जोधपुर एम्स की यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की गलती नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का सबूत है। जहां नाम की गफलत ने जिंदगी और मौत के बीच की रेखा मिटा दी।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में पिछले 5 साल का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान से पहले, जी राजस्थान, महानगर टाइम्समें सेवा दे चुके हैं। राजस्थान विश्विद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। गुलाबी नगरी जयपुर में ही जन्म हुआ। राजस्थान की राजनीति और समृद्ध कला, संस्कृति पर लिखना पसंद है। और पढ़ें

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