महिलाओं को राजनीति में जगह बनाने के लिए पुरुषों से तीन गुना ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है - पूर्व CM राजे

Jan 24, 2026 08:35 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि राजनीति आज भी महिलाओं के लिए आसान क्षेत्र नहीं है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तीन गुना अधिक मेहनत, संघर्ष और धैर्य दिखाना पड़ता है, तब जाकर उन्हें राजनीति में अपनी जगह बनानी पड़ती है। 

महिलाओं को राजनीति में जगह बनाने के लिए पुरुषों से तीन गुना ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है - पूर्व CM राजे

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि राजनीति आज भी महिलाओं के लिए आसान क्षेत्र नहीं है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तीन गुना अधिक मेहनत, संघर्ष और धैर्य दिखाना पड़ता है, तब जाकर उन्हें राजनीति में अपनी जगह बनानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में बराबरी की भागीदारी से ही इसका उद्देश्य पूरा होगा।

वसुंधरा राजे शनिवार को जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।

प्रतिनिधित्व बढ़ा, लेकिन मंज़िल अभी दूर

पूर्व मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज़ादी के समय देश में महिलाओं की साक्षरता दर केवल 9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह प्रगति का संकेत जरूर है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार बनने वाली महिलाओं की संख्या आज भी करीब 10 प्रतिशत के आसपास है, जबकि वर्ष 1957 में यह आंकड़ा मात्र 3 प्रतिशत था। पहली लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 22 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 74 तक पहुंची है। राज्यसभा में भी महिला सदस्यों की संख्या 1952 में 15 थी, जो अब 42 हो गई है।

राजे ने कहा कि ये आंकड़े यह बताते हैं कि स्थिति बदली है, लेकिन महिलाओं की भागीदारी अभी भी पुरुषों के बराबर नहीं है। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की समान हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी।

शिक्षा को बताया सबसे मजबूत आधार

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह साबित किया है कि शिक्षा ही महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है। जब महिलाएं शिक्षित होती हैं, तो वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए भी बेहतर फैसले लेती हैं।

उन्होंने जाट समाज की महिला नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कमला बेनीवाल, हेमा मालिनी, सुमित्रा सिंह, प्रियंका चौधरी, रीटा चौधरी, शिखा मील, सुशीला बराला, पद्मश्री से सम्मानित कृष्णा पूनिया, कमला कंस्वा और दिव्या मदेरणा जैसी महिलाओं ने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। ये सभी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

जाट आरक्षण को बचाने का श्रेय वसुंधरा राजे को: राजाराम मील

कार्यक्रम में जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने कहा कि जाट समाज के आरक्षण को बचाने का श्रेय वसुंधरा राजे को जाता है। उन्होंने कहा कि जब आरक्षण पर संकट था, तब राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए राजे ने इसे सुरक्षित रखा।

राजाराम मील ने कहा कि धौलपुर और भरतपुर क्षेत्र के जाटों को आरक्षण का लाभ दिलाने में भी वसुंधरा राजे की निर्णायक भूमिका रही है। जाट समाज उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखेगा।

अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार

कार्यक्रम में विधायक शिखा मील, पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया और पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र चौधरी ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य हैं।

अपने संबोधन के अंत में वसुंधरा राजे ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की असली ताकत महिला शक्ति ही है। उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं नेतृत्व की भूमिका के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करें।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

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सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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