
कौन हैं राजस्थान के मोरपाल सुमन जिन्हें बीजेपी ने अंता से बनाया प्रत्याशी; जानिए क्या है इनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि
राजस्थान की अंता विधानसभा में बीजेपी ने मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बारां के माली समाज से जुड़े और पंचायत राज से लेकर संगठन तक अनुभव रखने वाले मोरपाल सुमन अब उसी सीट से बीजेपी की जीत का दांव लगाने जा रहे हैं।
राजस्थान की अंता विधानसभा में बीजेपी ने मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बारां के माली समाज से जुड़े और पंचायत राज से लेकर संगठन तक अनुभव रखने वाले मोरपाल सुमन अब उसी सीट से बीजेपी की जीत का दांव लगाने जा रहे हैं।

मोरपाल सुमन की राजनीतिक कहानी करीब तीन दशकों पुरानी है। 1992 में वे भाजपा युवा मोर्चा देहात मंडल (बारां) के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1995 से 1998 तक भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिलाध्यक्ष रहे। 1995 में पहली बार पंचायत समिति सदस्य चुने जाने के बाद जनवरी 2000 में वे सरपंच बने। 2007 से 2009 तक जिला बारां के जिलामंत्री रहे और 2010 से 2013 तक देहात मंडल के अध्यक्ष रहे।
बीजेपी संगठन में उनकी साख मजबूत रही है। 2014-15 में वे अंता विधानसभा प्रभारी और जिलामंत्री रहे। 2016 से लगातार भाजपा जिला बारां के महामंत्री और अंता प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके अलावा, व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में भी उनका दखल है। किराना संघ के महासचिव रहकर उन्होंने व्यापारी और जनता दोनों से जुड़ाव बनाया।
मोरपाल सुमन की छवि साफ-सुथरी और आम लोगों से जुड़ी हुई है। वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शाह के अनुसार, उनकी सरलता और ईमानदारी ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। इसी वजह से बीजेपी ने उन्हें अंता उपचुनाव में मौका दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पहले ही संकेत दे चुके थे कि अंता से एक “लो-प्रोफाइल लेकिन जनता में लोकप्रिय” चेहरे को मौका मिलेगा।
उनका अंता क्षेत्र में असरदार आधार है। 21 दिसंबर 2021 में पंचायत राज चुनाव में जीतने के बाद जनवरी 2022 में प्रधान पद का कार्यभार संभाला। 2015 में जिला परिषद बारां के वार्ड नंबर 7 से चुनाव भी लड़ा। पत्नी नटी बाई 2020 से ग्राम पंचायत तिसाया की सरपंच रह चुकी हैं, जिससे परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है।
हैरान करने वाली घटना यह भी रही कि टिकट की घोषणा से कुछ दिन पहले मोरपाल सुमन ठगी का शिकार भी हुए। एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली बीजेपी मुख्यालय का अधिकारी बताया और टिकट के नाम पर 38 हजार रुपए मांगे। मोरपाल सुमन ने अपने बेटे की मदद से यह राशि ट्रांसफर कर दी। बाद में मामला खुला, लेकिन इससे उनकी साख को कोई चोट नहीं लगी।
अब अंता उपचुनाव में मोरपाल सुमन की जीत पर सबकी नजरें हैं। संगठन में अनुभव, जनता से जुड़ाव और माली समाज में पकड़ उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनकी जीत बीजेपी के लिए अंता विधानसभा में मजबूती का संकेत होगी।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




