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Rajasthan Election: राजस्थान की कमान केंद्रीय नेताओं के हाथ में क्यों? वसुंधरा राजे फैक्टर या रणनीति

राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी का चुनाव प्रचार चरम पर है। बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के दौरे लगातार हो रहे हैं। वसुंधरा राजे की डिमांड सिर्फ खुद के समर्थकों के प्रचार करने तक ही सीमित है।

Rajasthan Election: राजस्थान की कमान केंद्रीय नेताओं के हाथ में क्यों? वसुंधरा राजे फैक्टर या रणनीति
Prem Meenaलाइव हिंदुस्तान,उदयपुरTue, 14 Nov 2023 06:24 AM
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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर वसुंधरा राजे ने खुद को अपने समर्थकों के लिए प्रचार करने तक ही सीमित कर लिया है। प्रदेश में बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के दौरे लगातार हो रहे हैं। राजस्थान में जिस तरह बीजेपी नेताओं के अलग-अलग ग्रुप बने हैं। सब खुद को सीएम पद का दावेदार मानते हुए कोशिश करते रहे कि पार्टी सीएम उम्मीदवार का ऐलान कर दे। लेकिन इस बार बीजेपी आलाकमान ने इसे देखते हुए विधानसभा चुनाव की कमान बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपने हाथ में ही रखी है। किसी चेहरे को आगे नहीं किया। 

ब़ता दें सितंबर में बीजेपी राजस्थान में चार परिवर्तन यात्रा निकाली। इन चारों यात्राओं की कमान पहले चार अलग-अलग नेताओं को दी गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को यात्रा का नेतृत्व करना था। लेकिन फिर बीजेपी ने प्लान बदल दिया। बीजेपी का कहना है कि कोई एक नेता किसी एक यात्रा का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा, बल्कि सभी यात्राओं में सांसद, विधायक, पार्टी पदाधिकारी शामिल होंगे। चार अलग-अलग परिवर्तन यात्रा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अलग-अलग जगहों से हरी झंडी दिखाकर रवाना की थी। 

बीजेपी आलाकमान ने दिया सियासी संदेश 

दिवाली के बाद पीएम मोदी समेत पार्टी के स्टार प्रचारकों के दौरों में की डिमांड बढ़ी है।पीएम मोदी, अमित शाह, निर्मला सीतारमण, योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह के प्रचार के लिए आएंगे। लेकिन खा बात यह है कि चुनाव प्रचार की कमान वसुंधरा राजे के हाथ में नहीं है। चुनाव की पूरी कमान केंद्रीय नेताओं के हाथ में है। यह इसलिए किया गया है ताकि राज्य के किसी एक नेता को आगे करने से यह संदेश न जाए कि पार्टी उन्हें सीएम उम्मीदवार के रूप में देख रही है। इससे पार्टी का फायदा कम और नुकसान की ज्यादा आशंका है। राजस्थान बीजेपी में इसी गुटबाजी के चलते बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को हटाकर सीपी जोशी का अध्यक्ष पद दिया था। वसुंधरा राजे और पूनिया के बीच खींचतान की खबरें सुर्खियों में रहती थीं और दोनों के समर्थक एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी भी करते रहे हैं।

वसुंधरा राजे समर्थकों तक सीमित

राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के हाथ चुनाव प्रचार की कमान नहीं है। वसुंधरा राजे सिर्फ अपने समर्थकों तक सीमित है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे के हाथ में पूरी तरह से चुनाव प्रचार की कमान थी। इस बार राजस्थान में बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी। लेकिन वसुंधरा राजे दूरी बनाए हुए थीं। वसुंधरा राजे ने खुद अपने समर्थकों के लिए प्रचार करने तक के लिए सीमित कर लिया है। उल्लेखनीय है कि 2003 और 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले जब बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी उस वक्त इसकी अगुवाई वसुंधरा राजे ने की थी। 

खेमों में बंटे बीजेपी नेता 

राजस्थान में सीएम फेस को लेकर जब पूर्व वसुंधरा राजे के नाम को पीछे कर दिया तब से ही गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। इसकी झलक पार्टी उम्मीदवारों की सूची में भी दिखाई दी। वसुंधरा राजे के कट्टर समर्थक माने जाने वाले .युनूस खान, राजपाल सिंह शेखावत, अशोक परनामी और कैलाश मेघवाल के टिकट काट दिए दिए। हालांकि, इसके बावजूद भी वसुंधरा राजे अपने करीब 70-80 समर्थकों टिकट दिलाने में कामयाब रही है। राजस्थान बीजेपी में दो गुट है। वसुंधरा राजे और वसुंधरा राजे विरोधी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, सतीश पूनिया और दीया कुमारी वसुंधरा राजे की धुर विरोधी मानी जाती है। 

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