SMS मेडिकल कॉलेज के घूसखोर न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष अग्रवाल सस्पेंड,जमानत खारिज

SMS मेडिकल कॉलेज के घूसखोर न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष अग्रवाल सस्पेंड,जमानत खारिज

संक्षेप:

सात दिन की प्रशासनिक खींचतान और विभागीय प्रक्रिया के बाद आखिरकार SMS मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्रिंसिपल और न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष अग्रवाल पर कार्रवाई हो गई है।

Oct 17, 2025 09:46 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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सात दिन की प्रशासनिक खींचतान और विभागीय प्रक्रिया के बाद आखिरकार SMS मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्रिंसिपल और न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष अग्रवाल पर कार्रवाई हो गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की सिफारिश के बाद कार्मिक विभाग ने शुक्रवार को उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए।

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डॉ. अग्रवाल को 10 अक्टूबर से निलंबित माना गया है, यानी उसी दिन से जब उन्हें एसीबी (Anti-Corruption Bureau) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उनका हैडक्वार्टर जोधपुर स्थित एस.एन. मेडिकल कॉलेज रहेगा।

एसीबी की कार्रवाई के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजी थी। कॉलेज प्रिंसिपल ने विभाग को बताया था कि डॉ. अग्रवाल को एसीबी ने एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने निलंबन की सिफारिश की थी।

विभाग ने इस सिफारिश को आगे कार्मिक विभाग को भेजा। यहां से प्रस्ताव राज्यपाल के अनुमोदन के बाद पारित हुआ और शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी कर दिए गए।

10 अक्टूबर को एसीबी जयपुर की टीम ने डॉ. मनीष अग्रवाल को उनके सरकारी आवास से एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।

बताया गया कि उन्होंने यह राशि एक निजी मेडिकल से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाने के बदले में मांगी थी। एसीबी की टीम ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

इस कार्रवाई ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया था क्योंकि डॉ. अग्रवाल न केवल वरिष्ठ न्यूरोसर्जन हैं बल्कि कॉलेज के प्रशासनिक ढांचे में भी अहम भूमिका निभा रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, डॉ. अग्रवाल पर अत्यधिक जिम्मेदारियां केंद्रित थीं। वे न सिर्फ न्यूरोसर्जरी विभाग के HOD थे, बल्कि कॉलेज के अतिरिक्त प्रिंसिपल के रूप में 11 अलग-अलग शाखाओं की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

इनमें आईटी सेल, आरटीआई एवं लीगल सेल, महिला एवं जनाना हॉस्पिटल का सुपरविजन, पैरा क्लिनिकल डिपार्टमेंट, सफाई और मेंटेनेंस से जुड़े कई अन्य कार्य शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार, “वे अकेले 11 लोगों का काम देख रहे थे,” जिससे उन पर काफी शक्ति और प्रभाव केंद्रित हो गया था।

कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में डॉ. मनीष अग्रवाल का मुख्यालय जोधपुर के एस.एन. मेडिकल कॉलेज में रहेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

डॉ. अग्रवाल को सीनियर प्रोफेसर, न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट और अतिरिक्त प्रिंसिपल — दोनों पदों से निलंबित किया गया है।

आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि उन्हें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती। खबर ये भी है की उनकी जमानत भी कोर्ट ने खारिज कर दी है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में पिछले 5 साल का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान से पहले, जी राजस्थान, महानगर टाइम्समें सेवा दे चुके हैं। राजस्थान विश्विद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। गुलाबी नगरी जयपुर में ही जन्म हुआ। राजस्थान की राजनीति और समृद्ध कला, संस्कृति पर लिखना पसंद है। और पढ़ें

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